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पेट की चर्बी को 20 दिन में खत्म कर देंगे ये योगासन- जरुर पढ़े

योगासन के माध्यम से पाएं सपाट पेट: क्या आप कुछ किलो वजन कम करना चाहते हैं लेकिन जिम ज्वाइन नहीं करना चाहते हैं? तो आप बिल्कुल सही जगह आये हैं। पेट की अधिक चर्बी आपके पूरे लुक को खराब कर सकती है। इसे हटाने के लिए योग का सहारा लिया जा सकता है। हमने आपके लिए 20 आसान योग आसन की लिस्ट तैयार की है। रोज ये 20 आसान योग आसन करने से आपको पेट की चर्बी कम करने, मोटापा घटाने, मांसपेशियों को मजबूत करने, एब्स बनाने और शरीर के लचीलेपन में सुधार करने में मदद मिलेगी।

पेट कम करने के लिए योगासन –

जैसे हर योग को करने की एक विधि होती है, उसी प्रकार सभी योगासन को एक क्रम में करना जरूरी होता है। योग की शुरुआत खड़े होकर किए जाने वाले आसनों से की जाती है। इसके बाद बैठकर और फिर लेटकर योगासन किए जाते हैं। हम भी उसी क्रम में आपको योगासन बता रहे हैं और आप इसी क्रम में इन्हें करेंगे, तो अधिक लाभ होगा। पेट कम करने के लिए योगासन (pet kam karne ke liye yoga) इस प्रकार हैं :

ताड़ासन

इसे करने से पूरे शरीर में खिंचाव महसूस होता है और ऊर्जा आती है। रक्त का प्रवाह बेहतर हो जाता है।

कैसे करें :

  • सबसे पहले सीधा खड़े हो जाएं और अपनी टांगों, कमर व गर्दन को सीधा रखें।
  • अब हाथों की उंगुलियों को आपस में फंसाते हुए सिर के ऊपर ले जाएं और गहरी सांस भरते हुए पूरे शरीर को ऊपर की ओर खींचें। हथेलियां आसमां की दिशा में होनी चाहिएं।
  • साथ ही एड़ियों को भी ऊपर उठा लें। पूरे शरीर का संतुलन पंजों पर आ जाना चाहिए।
  • इस दौरान पंजों से लेकर ऊपर हाथों तक खिंचाव महसूस करें।
  • कुछ सेकंड इसी अवस्था में रहें और सामान्य गति से सांस लेते व छोड़ते रहें।
  • फिर धीरे-धीरे पहली वाली स्थिति में आ जाएं।
  • इस तरह के कम से कम दो-तीन चक्र एक बार में किए जा सकते हैं।

विविधता : ताड़ासन के साथ आप तिर्यक ताड़ासन भी कर सकते हैं। इसमें पंजों के बल खड़ा नहीं हुआ जाता और हाथों को ऊपर करके कमर के हिस्से से सांस लेते हुए पहले दाएं और फिर बाएं झुका जाता है।

पादहस्तासन

यह दो शब्दों के योग पद यानी पैर और हस्त यानी हाथों के योग से बना है। यह योग करते समय हाथों को जमीन पर पैरों के साथ सटा कर रखा जाता है, जिस कारण इसे पादहस्तासन कहा जाता है।

योगासन
योगासन

कैसे करें :

  • योग मैट पर पैरों को आपस में जोड़कर सीधे खड़े हो जाएं और हाथों को भी सीधा रखें।
  • अब सांस लेते हुए हाथों को ऊपर उठाएं।
  • इसके बाद सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें और दोनों हथेलियों को पैरों के पास जमीन के साथ सटाने की कोशिश करें।
  • साथ ही अपने माथे को घुटनों के साथ लगाने का प्रयास करें।
  • इस अवस्था में सांस को रोककर रखें। ध्यान रहे कि कमर से नीचे का हिस्सा मुड़ना नहीं चाहिए।
  • कुछ सेकंड इसी मुद्रा में रहें और फिर सांस लेते हुए ऊपर उठें और हाथों को ऊपर ले जाते हुए पीछे झुकने का प्रयास करें।
  • इसके बाद फिर सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें। करीब तीन से चार बार ऐसा करें।

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पश्चिमोत्तानासन

पोस्चर में सुधार के साथ, थकान और मोटापा कम करना।

कैसे करें :

  • सबसे पहले आप सीधे खड़े हो जाएं और फिर दोनों पैरों के बीच करीब तीन से चार फुट की दूरी बना लें।
  • इसके बाद दाएं पैर को 90 डिग्री के कोण में धुमाएं।
  • फिर गहरी सांस भरते हुए बाहों को शरीर से दूर फैलाकर कंधे की सीध में ले आएं।
  • अब सांस छोड़ते हुए दाएं घुटने को 90 डिग्री के कोण तक मोड़ते हुए दाईं और झुकेंगे।
  • अब दाएं हाथ को दाएं पैर के पीछे जमीन पर रखने का प्रयास करें। अगर हाथ को जमीन पर रखने में परेशानी हो, तो जमीन को उंगलियों से छूने का प्रयास करें।
  • वहीं, बाएं हाथ को 60 डिग्री में लाते हुए कान के पास लाने का प्रयास करें और बाएं हाथ की उंगुलियों को देखने का प्रयास करें। इस दौरान सामान्य रूप से सांस लेते रहे।
  • यथासंभव इसी स्थिति में रहे और फिर सांस लेते हुए सामान्य मुद्रा में आ जाएं।
  • इसके बाद बाईं तरफ भी इसी प्रक्रिया को दोहराएं।
योगासन
योगासन

शवासन

इसे सभी योगों के अंत में किया जाता है, ताकि शरीर शांत और स्थिर हो जाए। इसे करते समय शरीर शव के समान हो जाता है। यह भले ही देखने में आसान नजर आए, लेकिन करना उतना ही मुश्किल है।

कैसे करें :

  • सभी योगासन करने के बाद योग मैट पर कमर के बल लेट जाएं और आंखें बंद कर लें।
  • दोनों पैरों के बीच एक या दो फुट की दूरी रखें और हाथों को शरीर से थोड़ा दूर फैलाकर रखें।
  • हथेलियां ऊपर की दिशा में होनी चाहिएं।
  • अब धीरे-धीरे सांस लेते और छोड़ते रहें और पूरा ध्यान सांसों की गतिविधियों पर रखें।
  • फिर अपना ध्यान एक-एक करके पैरों से लेकर सिर तक के सभी अंगों पर ले जाएं और महसूस करें कि आप हर तरह के तनाव से मुक्त हो रहे हैं। शरीर के प्रत्येक अंग को आराम मिल रहा है।
  • कुछ देर इसी अवस्था में रहें और जब लगे कि शरीर तनाव मुक्त हो गया है और मन शांत है, तो बाएं ओर करवट लेकर हाथों का सहारा लेते हुए बैठ जाएं और धीरे-धीरे अपनी आंखें खोलें।

त्रिकोणासन

इस आसन की घुमादार गति मांसपेशियों का निर्माण कर सकती है और पेट की चर्बी को गला सकती है।

कैसे करें :

  • आप दोनों पैरों के बीच करीब दो फुट की दूरी बनाकर खड़े हो जाएं। दोनों हाथों को शरीर के साथ सीधे सटाकर रखें।
  • अब अपनी बांहों को शरीर से दूर कंधे तक फैलाएं और सांस लेते हुए दाएं हाथ को ऊपर ले जाते हुए कान से सटा लें।
  • इसके बाद धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए कमर से बाईं ओर झुकें। इस दौरान दायां हाथ कान से सटा रहना चाहिए और घुटनों को न मोड़ें।
  • अब दाएं हाथ को जमीन के समानांतर लाने का प्रयास करें। साथ ही बाएं हाथ से बाएं टखने को छूने का प्रयास करें।
  • जब तक संभव हो इसी मुद्रा में रहें और धीरे-धीरे सांस लेते व छोड़ते रहें।
  • फिर सांस लेते हुए सामान्य स्थिति में आ जाएं।
  • इसी तरह से दाईं ओर भी करें।
  • आप इस तरह के तीन से चार चक्र कर सकते हैं।

धनुरासन

यह आसन पेट की चर्बी को जलाने, छाती और जांघों को मजबूत बनाने के लिए सर्वोत्तम है।

कैसे करें :

  • योग मैट पर पेट के बल लेट जाएं और सांस छोड़ते हुए घुटनों को मोड़ें और हाथों से टखनों को पकड़ने का प्रयास करें।
  • अब सांस लेते हुए सिर, छाती और जांघों को ऊपर उठाने का प्रयास करें।
  • आप सुविधानुसार शरीर को जितना ऊपर उठा सकते हैं उठाएं।
  • अंतिम अवस्था में पहुंचकर शरीर का पूरा भार पेट के निचले हिस्से पर डालने का प्रयास करें।
  • इसके बाद दोनों पैरों के बीच की दूरी को कम करने का प्रयास करें।
  • कुछ देर इसी मुद्रा में रहते हुए धीरे-धीरे सांस लेते व छोड़ते रहें।
  • अंत में लंबी गहरी सांस छोड़ते हुए सामान्य स्थिति में लौट आएं।
  • एक बार में इस तरह के चार-पांच चक्र किए जा सकते हैं।

सूर्य नमस्कार योग

यह आसन रक्त परिसंचरण में सुधार करता है, प्रमुख मांसपेशियों को टोन करता है और पाचन तंत्र में सुधार करता है।

कैसे करें :

  • प्रणाम आसन : योग मैट पर सीधे खड़े हो जाएं और हाथों को छाती के पास नमस्कार की मुद्रा में रखें।
  • हस्तउत्तानासन : अब सांस लेते हुए हाथों को ऊपर उठाकर कान के पास सटाएं और पीछे झुकने का प्रयास करें।
  • पादहस्तासन : इसके बाद सांस छोड़ते हुए पेट के बल झुकें और हथेलियों को जमीन पर सटाने की कोशिश करें। साथ ही घुटनों को बिना मोड़े माथे को घुटने से स्पर्श करने का प्रयास करें।
  • अश्व संचालनासन : फिर सांस लेते हुए दाएं पैर पर बैठ जाएं और बाएं पैर को पीछे ले जाएं। इस मुद्रा में बायां घुटना जमीन पर लगाएं।
  • पर्वतासन : अब सांस छोड़ते हुए दाएं पैर को भी पीछे ले जाएं और शरीर को बीच से उठाएं। इस मुद्रा में अपनी एड़ियों को जमीन से स्पर्श करने का प्रयास करें और बाजुओं को सीधा रखें।
  • अष्टांगासन : इसके बाद सांस लेते हुए जमीन पर लेट जाएं। इस अवस्था में सिर्फ ठुड्डी, छाती और घुटने ही जमीन से स्पर्श करेंगे। पेट और कूल्हों को उठाकर रखें।

उत्तानपादासन

उत्तान का अर्थ होता है ऊपर उठा हुआ और पाद का अर्थ पैरों से होता है। इस आसन में पैरों को थोड़ा-सा ऊपर उठाया जाता है, इसलिए यह उत्तानपादासन कहलाता है। यह लेटकर किया जाने वाला महत्वपूर्ण आसन है।

कैसे करें :

  • योग मैट पर कमर के बल सीधा लेट जाएं और हाथों को शरीर से सटा कर रखें।
  • हथेलियों की दिशा जमीन की ओर होनी चाहिए।
  • अब लंबी गहरी सांस भरते हुए पैरों को करीब 30 डिग्री के कोण तक ऊपर उठाएंगे।
  • ध्यान रहे कि सिर को नहीं हिलाना है।
  • पैरों को इतना ही उठाना है कि वो हमें नजर न आएं।
  • करीब 30 सेकंड तक इसी अवस्था में रहें और धीरे-धीरे सांस लेते व छोड़ते रहें।
  • इसके बाद लंबी गहरी सांस छोड़ते हुए पैरों को नीचे ले आएं और विश्राम करें।
  • इस आसन को करीब तीन से चार बार करें।

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Satya Sharma

मैं अंग्रेजी दवाओं के मुकाबले घरेलु नुस्खों, आयुर्वेद और देसी इलाज को ज्यादा महत्चपूर्ण और कारगर मानती हूँ. सही खान-पान से और नियमित दिनचर्या से वैसे ही बीमारियों से बचा जा सकता है. अंग्रेजी दवाओं के दुष्प्रभाव से बचाने और भारतीय चिकित्सा पद्दति को बढ़ावा देने के लिए मेरी वेबसाइट से जुड़िये और अपने दोस्तों को भी इसके बारे में बताइए.

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