तेजी से वजन घटाए, दिल की बीमारी, ब्लड प्रेशर, कैंसर का सबसे आसन इलाज- कोई खर्च नही

इन दिनों वजन घटाने के लिए अनेकों नयी तरकीबें आजमाई जा रही हैं. इन्ही में से एक है वाटर फास्टिंग (Water Fasting). आज हम इसी के बारे में बात कर रहे हैं.

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आइये जानते हैं वजन घटाने के इस बड़े ही साधारण और अनूठे तरीके के बारे में –

क्या है वाटर फास्टिंग?

वाटर फास्टिंग वैसे तो हजारों साल पुरानी भारतीयों द्वारा अपनाई गयी व्रत रखने की विधि जैसी ही है, लेकिन इसमें थोडा फर्क है बस.

पिछले कुछ वर्षों में काफी इस्तेमाल में आई और अधिक प्रचलित हुई वजन घटाने कि इस विधि में सिवाय पानी के और किसी भी चीज़ का सेवन नहीं किया जाता. ऐसे में न तो भोजन करने की अनुमति होती है, न किसी चाट पकौड़े खाने की और यहाँ तक कि फल और सब्जियों को खाने की भी अनुमति नहीं है.

इस फास्टिंग के दौरान सख्त तौर पर सिर्फ पानी का ही सेवन किया जाता है जितनी अवधि के लिए वाटर फास्टिंग करनी हो तब तक.

अमूमन इसकी अवधि 24 घंटों से लेकर 72 घंटों तक होती है, लेकिन अपनी ज़रूरत और सामर्थ्य के अनुसार लोग इस फास्टिंग का इस्तेमाल ज्यादा वजन घटने के लिए हफ्ते भर यानि 7 दिन तक भी करते हैं.

वाटर फास्टिंग का सही तरीका

वाटर फास्टिंग करने के लिए पहले शरीर को तैयार करना होता है. चूँकि इस अवधि के दौरान और कुछ भी खाना पीना नहीं होता और पानी में कोई पोषक तत्व नही होते तो कहीं ऐसा न हो कि शरीर में ज़रूरी पौषक तत्वों की कमी हो जाये. इसलिए इसकी तैयारी पहले से खा कर कीजिये.

  • सबसे पहले ये तय कीजिये कि आपको कितने समय के लिए ये व्रत रखना है.
  • उस दौरान सिवाय सादे पानी के कुछ भी और खाना पीना नहीं है. चाय पानी दूध कुछ नहीं. न तरल पदार्थ न ही ठोस.
  • पानी में भी कोई ग्लूकोस, नमक, शहद, चीनी, नीम्बू इत्यादि कुछ नहीं मिलाना है, सिर्फ सादा पानी.
  • पूरी अवधि के दौरान थोड़े थोड़े समय बाद थोडा थोडा पानी पिएं. एक दम ज्यादा पानी न पियें. लेकिन 3 लीटर पानी ज़रूर पियें.
  • अगर शौचालय बार बार जाना पड़े तो उसकी व्यवस्था रखें.

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वजन घटने के अलावा और भी हैं फायदे

इस तरीके से वजन घटाने का काम बड़ी तेज़ी से होता है. एक ही दिन में 2 पौंड यानि 900 ग्राम वजन तक बड़ी आसानी से घटाया जा सकता है. लेकिन इसके फायदे सिर्फ वजन घटने तक ही सीमित नहीं है. बल्कि और भी फायदे हैं –

डीटोक्सीफिकेशन –

वाटर फास्टिंग के दौरान शरीर को हानिकारक विषैले तत्व पानी के ज़रिये बाहर निकालने में बहोत मदद मिलती है. इससे पूरे शरीर की सेहत में सुधर होता है.

किडनी

किडनी को भी इस दौरान काम करने में आसानी होती है और बाकी दिनों के मुकाबले आराम मिलता है तो बेहतर काम करती है.

पाचन तंत्र

पाचन तंत्र पर भी इस फास्टिंग का सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, क्योंकि कुछ न खाने से पाचन तंत्र भोजन पचाने में लगाने वाले समय और उर्जा को खुद को ठीक करने और अधिक खाने और बढे हुए वजन से हुई क्षति को पूरा करने में लगता है.

ब्लड प्रेशर

उच्च रक्तचाप कम करने में भी यह विधि सहायक है. 68 लोगों के समूह पर इसके प्रयोग से पाया गया कि फास्टिंग पूरी करने के बाद उनका उच्च रक्तचाप कम हो गया था.

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इनके लिए शरीर की प्रतिक्रिया को बेहतर बनता है. मतलब शुगर के मरीजों को इससे फायदा होता है.

 

कैंसर

कैंसर जैसी भयंकर बीमारी जिसमें मृत कोशिकाएं इक्कट्ठा हो कर कैंसर का रूप धारण कर लेती हैं, उस पर भी इस फास्टिंग का प्रभाव देखा गया है. चूँकि शरीर पानी के ज़रिये कोशिकाओं के स्तर पर काम करता है इससे इनमें जमा कचरा, व्यर्थ पदार्थ और मृत कोशिकाओं को शरीर से बाहर निकालने का काम करता है जिससे कैंसर जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है. हालांकि इस पर अभी और शोध किये जाने की आवश्यकता है, लेकिन इससे फायदा तो होता है.

दिल की बीमारियाँ

एक शोध में 30 वयस्कों को 24 घंटों के लिए वाटर फास्टिंग करने को कहा गया. जिसके समाप्त होने पर उनके बलोद टेस्ट रिपोर्ट में सामने आया कि कोलेस्ट्रोल और ट्राईग्लीसराइड की मात्रा पहले के मुकाबले कम पायी गयी. ये दोनों ही दिल की बीमारी में बेहद बड़े कारण हैं. ऐसे में वाटर फास्टिंग से दिल की बीमारियों से खतरा कम हो सकता है.

वाटर फास्टिंग से जुड़े हैं बड़े खतरे भी

हालांकि इस से फायदे बेहद चौंकाने वाले हैं, लेकिन शोध से ये भी पता चला है कि इससे जुड़े कुछ खतरे भी नज़रंदाज़ नहीं किये जा सकते हैं. इनमें कुछ ध्यान देने वाले खतरे यहाँ बताये गये हैं –

गलत तरीका का वजन घटता है

इस तरीके से घटाया गया वजन शरीर में मौजूद पानी का ही वजन है. इससे फैट नहीं कम होता है. क्योंकि फैट को सिर्फ खाने के अभाव से शरीर उर्जा में बदलना शुरू नहीं करता. फैट को तोड़ने के लिए शरीर को कम से कम 3 दिन का समय लगता है जो कि इस व्रत की अवधि से अधिक है. ऐसे में घटाया गया वजन शरीर में जमा हुए पानी और मसल का ही वजन है.

डिहाइड्रेशन 

ये भले ही सुनने में अजीब लगे, लेकिन शरीर को पानी की आपूर्ति का लगभग 30% हिस्सा खाने में मौजूद पानी से मिलता है. ऐसे में खाने के अभाव से शरीर को ये 30% पानी नहीं मिलने से डिहाइड्रेशन भी हो सकती है.

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ये वो स्थिति है जिसमें खड़े होने के तुरंत बाद से चक्कर आटा है, कमजोरी महसूस होती है और सर घूमता है. वाटर फास्टिंग में कुछ लोगो के साथ ये अक्सर होता है. अगर ऐसा हो तो गाडी चलाना या कोई दुसरे काम नहीं करना चाहिए. ऐसे में वाटर फास्टिंग को आगे जारी नहीं रखना चाहिए और डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए.

पहले से बीमार होने पर स्थिति ख़राब हो सकती है

शोध से ऐसा भी सामने आया है कि गाउट, डायबिटीज, किडनी की बीमारियों, सीने में जलन जैसी समस्याओं में स्थिति और भी ख़राब हो सकती है और फायदे की जगह नुक्सान हो सकता है. इन परिस्थितियों में वाटर फास्टिंग करने से गंभीर समस्या हो सकती है.

इन बातों का ज़रूर रखें ख्याल

अगर आप इसे आज़माना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने चिकित्सक से परामर्श ज़रूर कर लें. ऐसा नहीं है कि इसके नुक्सान सभी को होते हैं. शरीर की तासीर और पहले से स्वास्थ्य के स्तर पर यह निर्भर करता है कि इसका कितना फायदा होगा. लेकिन सतर्क रहना और सही कदम उठाना बाद में नुकसान सहने से कहीं अधिक है.

इसके विधि के फायदे बहोत हैं. लगातार करने की बजाय इसे कुछ दिनों के अन्तराल पर आजमाया जा सकता है.

भारत में करवाचौथ के दिन रखे जाने वाले व्रत से इसकी तुलना की जा सकती है बस उसमें पानी और पीना है.

ये ज़रूर ध्यान रखें कि वाटर फास्टिंग पूरी करने के बाद खाने की तीव्र इच्छा हो सकती है. तो भर भर के खाना मत खाएं वरना शरीर पर उल्टा प्रभाव पद सकता है. कोई भी व्रत करने के बाद व्रत को हलके खाने से तोडा जाता है. इसके बाद भी ऐसा ही करना है और जितने दिन तक वाटर फास्टिंग करें उतने ही दिन तक उसके बाद हल्का खाना खाएं. जैसे 24 घंटे की है तो 1 दिन और 72 घंटे की है तो 3 दिन.

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स्वस्थ रहिये – खुश रहिये!

 

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Satya Sharma

मैं अंग्रेजी दवाओं के मुकाबले घरेलु नुस्खों, आयुर्वेद और देसी इलाज को ज्यादा महत्चपूर्ण और कारगर मानती हूँ. सही खान-पान से और नियमित दिनचर्या से वैसे ही बीमारियों से बचा जा सकता है. अंग्रेजी दवाओं के दुष्प्रभाव से बचाने और भारतीय चिकित्सा पद्दति को बढ़ावा देने के लिए मेरी वेबसाइट से जुड़िये और अपने दोस्तों को भी इसके बारे में बताइए.

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