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कहीं आप भी थाइरॉइड (Thyroid) की चपेट में तो नहीं है? और आपको पता ही नहीं! ज़रूर पढ़िए

सरकारी सर्वे के मुताबिक पिछले 3 सालों में भारतवासियों के थाइरॉइड के केस 35% बढ़ गये हैं, कहीं आप भी तो इसके शिकार नहीं हुए हैं? कहीं आप इससे अनजान तो नहीं? आज मैं आपको इसी के बारे में बता रही हूँ! पढना जारी रखिये!

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ज्यादा काम भी नहीं किया और थकान महसूस हो रही हो या खान-पान पर ध्यान देते हैं फिर भी वजन तेजी से बढ़ता ही जा रहा हो। शरीर में ऐसे कई बदलाव होते हैं जिनको हम पहले तो हल्के में लेते हैं और बाद में यह हमारी लिए किसी गंभीर रोग का संकेत निकलते हैं, थाइरॉइड की समस्या भी कुछ ऐसी ही है।

ये हैं दो प्रकार के थायराइड-

1. हाइपरथायरायडिज्म से एट्रियल फिब्रिलेशन, ऑस्टियोपोरोसिस और फ्रैक्चर होने की संभावना रहती है.

2. वहीं हाइपोथायरायडिज्म, मायक्सेडेमा कोमा और मृत्यु का कारण बनता है. थायरॉइड समस्याओं का सबसे आम कारण ऑटोम्यून्यून थायराइड रोग (एआईटीडी) है. यह एक वंशानुगत यानी जेनेटिक स्थिति है. जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली एंटीबॉडी उत्पन्न करती है. ये थायराइड ग्रंथियों को अधिक हार्मोन बनाने के लिए उत्तेजित करती है.

कैसे करें थाइरोइड की पहचान?

दोनों तरह के थाइरोइड के लक्षण वैसे तो लगभग सामान हैं लेकिन इनकी पहचान की जा सकती है. इसके लिए आप यहाँ बताई बातों पर ध्यान दीजिये.

  1. Hyperthyroidism यानि कि थाइरोइड बढ़ने के लक्षणों में सबसे ज्यादा सामान्य हैं – भूख में वृद्धि, घबराहट, बेचैनी, कमजोरी, नाजुक बाल, नींद आने में दिक्कत, बालों का ज्यादा झड़ना, मितली या उलटी आने जैसा मनन होना और पुरुषों में स्तन का विकास होना. इसके अलावा चक्कर आना, बेहोशी, तेज या अनियमित धड़कन और सांस लेने में दिक्कत होना जैसी दिक्कत हैं तो तुरंत चिकित्सक को दिखाने की ज़रूरत होती है.
  2. Hypothyroidism यानी कि थाइरोइड घटने की अवस्था में सामान्य लक्षणों में – थकान, ज्यादा ठण्ड महसूस होना, सूखी त्वचा होना, वजन बढ़ना, आवाज बैठ जाना या भारी हो जाना, मांसपेशियों में कमजोरी, यादाश्त कमजोर हो जाना, डिप्रेशन जैसे गंभीर लक्षण शामिल हैं.

क्यों होता है थाइरोइड?

दोनों प्रकार के थाइरोइड होने के कारण अलग अलग होते हैं. इन्हें अलग अलग तरीके से समझना चाहिए. एक में शरीर में थाइरोइड ग्रंथि अधिक सक्रिय हो कर थाइरोइड हारमोंस को बढ़ा देती है जिससे हाइपर-थाइरोइडजम होता है, जिसकी तुलना में दुसरे तरह के थाइरोइड के रोग यानी हाइपो-थाइरोइडजम में गथाइरोइड ग्रंथि सामान्य से कम करती है जिससे शरीर में थाइरोइड की कमी हो जाती है. इनके होने के कारणों को भी इस प्रकार जाना जा सकता है –

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  1. Hyperthyroidism एक तरह की अनुवांशिक बीमारी है. मतलब यह पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढती रहती है. इसके कारणों को काबू नहीं किया जा सका है. लेकिन फिर भी कुछ ऐसे कारक हैं जो इस समस्या के होने में बढ़ावा देते हैं जैसे तेज़ नमक खाना, ज्यादा आयोडीन का सेवन करना, थाइरोइड ग्लैंड में सूजन होना, महिलाओं के अंडाशय में वृषण के फोड़े होना और आहार या दवा के रूप में थाइरोइड हर्मोने T3 या T4 का सेवन कर लेना.
  2. Hypothyroidism थाइरोइड की ग्रंथि का आकार बढ़ जाने से होता है. इसके अलावा गले पर चोट लगने, आयोडीन की कमी हो जाने या दिमाग की किसी शल्य चिकित्सा यानि सर्जरी होने के कारण भी यह बीमारी होती है.

कैसे बचें थाइरोइड से?

थाइरोइड से बचना या सम्पूर्ण इलाज को फिलहाल मेडिकल जगत में खोजा नहीं गया है, लेकिन इसे जीवन शैली का हिस्सा बना कर नियमित दवाएं ली जायें तो इसके दुष्प्रभाव से बचा जा सकता है. इसके अलावा कुछ बातों का ध्यान रखिये तो भी थाइरोइड जीवन को ज्यादा प्रभावित नहीं करता –

  • धुम्रपान कम करें या बंद कर दें.
  • व्यायाम को जीवन शैली का हिस्सा बनाएं.
  • सुबह की ताज़ी हवा अपने फेफड़ों में ज़रूर भरें.

साथ ही आप इन घरेलु नुस्खों को अपना कर भी थाइरोइड को नियंत्रण में रख सकते हैं –

तुलसी और एलोवेरा :- दो चम्मच तुलसी के रस में आधा चम्मच एलोवेरा जूस मिला कर सेवन करने से भी थायरोइड की बीमारी से छुटकारा पाने का उतम उपाय है।

लाल प्याज़ :- प्याज़ को बीच से काट कर दो टुकड़े कर ले कर ले और रात को सोने से फेले थायरोइड ग्लैंड के आसपास मसाज करे। इसके बाद गर्दन से प्याज्ज का रस धोये नहीं।

हल्दी का दूध :- थायरोइड कंट्रोल करने के लिए आप रोज़ दूध मेन हल्दी को पका कर पिये। अगर हल्दी वाला दूध न पिया जाए तो हल्दी को भून कर इसका सेवन करने से थ्यरोइड कंट्रोल में रहता है।

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काली मिर्च :- काली मिर्च भी थायरोइड के लीये बहुत ही फायदेमंद है किसी भी प्रकार से कालीमिर्च का सेवन करे थायरोइड में फायदा मिलेगा।

अश्वगंधा :- रात को रोज सोते समय एक चम्मच अश्वगंधा चूर्ण का सेवन गाय के दूध के साथ सेवन करने से भी थायरोइड में फायदा मिलता है।

बादाम और अखरोट मेन सेलिनिउम तत्व मोजूद होता है जो थायरोइड के इलाज के लिए बहुत ह फायदेमंद है। इसके रोह सेवन से गले के सूजन में काफी आराम मिलता है।

एक्सर्साइज़ एवं प्राणायाम से थायरोइड का इलाज :- रोज आधा घंटा एक्सर्साइज़ करने से थायरोइड कंट्रोल में रेहता है और बढ़ता भी नहीं है। नियमित रूप से योग और प्राणायाम करने से थायरोइड ठीक कर सकते है। योग के अलावा आप meditation भी कर सकते है जिससे आप रिलैक्स होगे और थायरोइड ट्रीटमंट मे भी फायदा मिलेगा।

अदरक :- अदरक में मौजूद गुण जैसे पोटेशियम, मैग्नीश्यिम आदि थायराइड की समस्या से निजात दिलवाते हैं। अदरक में एंटी-इंफलेमेटरी गुण थायराइड को बढ़ने से रोकता है और उसकी कार्यप्रणाली में सुधार लाता है।

गेहूं और ज्वार का इस्तेमाल :- थायराइड ग्रंथी को बढ़ने से रोकने के लिए आप गेहूं के ज्वार का सेवन कर सकते हो। गेहूं का ज्वार आयुर्वेद में थायराइड की समस्या को दूर करने का बेहतर और सरल प्राकृतिक उपाय है। इसके अलावा यह साइनस, उच्च रक्तचाप और खून की कमी जैसी समस्याओं को रोकने में भी प्रभावी रूप से काम करता है।

 

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Satya Sharma

मैं अंग्रेजी दवाओं के मुकाबले घरेलु नुस्खों, आयुर्वेद और देसी इलाज को ज्यादा महत्चपूर्ण और कारगर मानती हूँ. सही खान-पान से और नियमित दिनचर्या से वैसे ही बीमारियों से बचा जा सकता है. अंग्रेजी दवाओं के दुष्प्रभाव से बचाने और भारतीय चिकित्सा पद्दति को बढ़ावा देने के लिए मेरी वेबसाइट से जुड़िये और अपने दोस्तों को भी इसके बारे में बताइए.

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