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शीशम प्रक्रति की ऐसी देन है, जो आपकी बहुत सी बीमारियों को जड़ से खत्म करता है.

नमस्कार दोस्तों, आज मैं आपको शीशम के फायदों के बारे में बताने जा रही हूँ.

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शीशम का पेड़ इमारतों और फर्नीचर में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। इसके अलावा इसके कई औषधीय लाभ भी हैं। शीशम एक स्वस्थ पेड़ है और पूरे भारत में पाया जाता है। बेशक यह एक आम पेड़ होता है लेकिन इसके कई उपयोग और स्वास्थ्य गुण हैं।

शीशम को आयुर्वेद में जड़ी-बूटी के रूप में प्रयोग किया जाता है। शीशम के पत्तों से निकलने वाले चिपचिपे पदार्थ को कई रोगों के उपचार में इस्तेमाल किया जाता है। इसके तेल को दर्दनाशक, अवसादरोधी, सड़न रोकने वाले, कामोत्तेजक, जीवाणु रोधक, कीटनाशक और स्फूर्तिदायक आदि के तौर पर प्रयोग किया जाता है। ब्राजील में शीशम के सदाबहार विशालकाय पेड़ पाये जाते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम एनिबा रोजाऐंडोर है। इसकी लकड़ी महंगी होती है। इसलिए इसका प्रयोग इमारतों में अधिक किया जाता है।

शीशम के फायदे-

दर्द में राहत-

यदि आपके दांतों में, सिर में या फिर जोड़ों में दर्द हैं तो इसमें शीशम का तेल काफी लाभकारी होता है। दांत में दर्द होने पर शीशम के तेल का फोया (रुई में तेल लगाकर) दांत के नीचे रख लें, इससे कुछ ही देर में आराम मिलेगा। सिर में दर्द होने पर शीशम के तेल की मालिश फायदेमंद होती है। वहीं जोड़ों में दर्द की समस्या में शीशम का तेल गर्म करके लगाने पर आराम देता है।

हृदय रोग में फायदेमंद-

यदि आपका कोलेस्ट्राल बढ़ गया है और आप हृदय रोग से ग्रस्त हैं तो शीशम के तेल का सेवन आपके लिए रामबाण साबित हो सकता है। शीशम के तेल का सेवन रक्त प्रवाह को बेहतर रखता है। इस तेल से बना खाना खाने से पाचन शक्ति भी मजबूत होती है।

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बुखार-

बुखार के लिए किसी भी प्रकार के बुखार में, 320 मिलीलीटर पानी और 160 मिलीलीटर दूध में इसका 20 ग्राम रस मिक्स करें। इसे अच्छी तरह उबाल लें। एक दिन में तीन बार रोगी को इसे दो।

अल्सर-

अल्सर के लिए प्रभावित हिस्से पर शीशम के तेल लगाएं। इससे खुजली, उत्तेजना और अल्सर को ठीक करने में मदद मिलती है।

आंखों की लालिमा का उपचार-

कीट-पतंगा गिरने से यदि आंख लाल हो गई है तो उसका उपचार शीशम के पत्तों से संभव है। आंखों के दर्द में भी शीशम काफी फायदेमंद है। शीशम के कोमल पत्तों को साफ करके मिक्सी में पीस लें। अब इसकी लुगदी को आंखों पर रात को सोते समय बांध लें। इससे आंखों की लालिमा और दर्द दोनों में ही राहत मिलेगी।

उल्टी दूर करे शीशम-

उल्टी आना, मन मिचलाने पर शीशम के पत्तों का सेवन करने से समस्या का निदान आसानी से होता है।

स्तनों की सूजन-

स्तनों की सूजन से परेशान महिलाओ को स्तनों पर शीशम के पत्ते गर्म कर के बांधने से स्तनों की सूजन में आराम मिलता है.

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कुष्ठ में शीशम का प्रयोग-

त्वचा पर कुष्ठ होने पर शीशम की ताजी कोमल लकड़ी लगभग 600 ग्राम बारीक पीसकर पानी में उबालें। गुनगुना होने पर नहाने से कुष्ठ फैलने से रोकने में सक्षम है।

स्त्री-पुरूष अंदुरूनी कमजोरियों में शीशम-

शीशम औषधि स्त्री पुरूष में पाई जाने वाली अंदुरूनी कमजोरियां मिटाने सक्षम पाई गई। शीशम के कई तरह के पेय रस बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं।

कैंसर में शीशम-

कैंसर होने पर रोज सुबह शाम शीशम हरे पत्तों का 1-2 चम्मच रस दाल चीनी पाउडर के साथ मिलाकर सेवन करने से तेजी से कैंसर में सुधार होता है। 30-40 दिन लगातार सेवन कर जरूर देंखें। आर्युवेद औषधि असर धीरे धीरे करती है। परन्तु बीमारी जड़ से समाप्त कर देती है।

नोट
अस्थमा और डायबिटीज मरीज शीशम जूस रस का सेवन न करें।

हम चाहते हैं कि हर भारतीय अंग्रेजी दवाओं की बजाय घरेलु नुस्खों और आयुर्वेद को ज्यादा अपनाये.

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