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शतावरी औषधीय गुणों की खान फायदे जान हैरान हो जायेगे आप

शतावरी ऊपर चढ़ने वाला एक पौधा है जिसकी पत्ती सूई (needle) जैसी होती हैं, तने और शाखाएं सुंदर एवं फूल बेहद नाजुक (delicate) होते हैं। शतावरी की हर्बल शक्ति क्रीम कलर की मोटी कंदमूल जड़ों में होती है। यह एक ऐसा पौधा है जिसकी जमीन के नीचे सौ से अधिक जड़ें होती हैं। यह शरीर को जीवन शक्ति एवं समग्र रस प्रदान करती है। यह महिलाओं के गर्भाशय को पोषण (nourishing) देकर प्रजनन क्षमता को बढ़ाती है और महिला के अंगों को गर्भावस्था के लिए तैयार करती है।

इसके अलावा यह गर्भपात (miscarriages) के खतरे को भी रोकती है। प्रजनन संबंधी समस्याओं को दूर करने के अलावा सतावरी तंत्रिका तंत्र (nervous disorders) संबंधी विकार, गले के संक्रमण, तपेदिक, खांसी और श्वासनली का प्रदाह (bronchitis) के इलाज में मदद करती है। यह वास्तव में सैकड़ों बीमारियों के इलाज में उपयोगी है।

भारत का आयुर्वेद के साथ सदियों पुराना नाता है और इसमें हर परेशानी का हल मौजूद है। इसमें न तो आपको ज्यादा दवाइयां लेनी होती हैं और न ही आपको इंजेक्शन लगवाने पडते हैं। आयुर्वेद के पिटारे में एक शानदार औषधी है जिसका नाम शतावरी है। ये एक पौधा है जिसकी जड़ों को आयुर्वेद में अमृत कहा जाता है।

शतावरी पुरुषों के काफी काम आती है लेकिन महिलाओं के लिए ये किसी वरदान से कम नहीं है। इसका स्वाद कड़वा होता है लेकिन इसके अंदर कई बीमारियों का हल मौजूद रहता है। इसे जादुई औषधी के नाम से भी पुकारा जाता है और ये आपके शरीर को रोगमुक्त बनाने में माहिर है। इसे कई नामों से मांगा जा सकता है जैसे कि शतावरी, सतावरी, सतावर, सतमुली, शटमुली, सरनाई इत्यादि

शतावरी के उपयोगी भाग (Useful Parts  of Shatavari)

  • जड़
  • जड़ से तैयार काढ़ा
  • पत्ते
  • पेस्ट
  • चूर्ण (shatavari churna)

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शतावरी का इस्तेमाल कैसे करें? (How to Use Shatavari in Hindi?)

आप शतावरी का उपयोग इस तरह से कर सकते हैंः-

  • रस- 10-20 मिली
  • काढ़ा- 50-100 मिली
  • चूर्ण- 3-6 ग्राम

शतावरी के फायदे-

कैंसर पर जीत दिलाने में करती है मदद:-

आज के समय में आपको कैंसर से जूझ रहे लोग आपके आस पास ही मिल जाएंगे, लेकिन उससे उबरकर जीत हासिल करने वाले लोग कम ही होते हैं। अगर किसी आपके अपने को कैंसर है तो आप उसे भी शतावरी का सेवन करने की सलाह दे सकते हैं। इसमें ग्लूटाथिओन होता है जो आपके शरीर की गंदगी को बाहर करता है। इससे हमारी सेहत अच्छी होती है और हम स्वस्थ जीवन के साथ हम ज्यादा जीवित रह पाते हैं। इसमें मौजूद ग्लूटाथिओन स्वस्थ रखने के साथ साथ हड्डियों के कैंपसर, ब्रेस्ट कैंसर, लंग कैंसर और कोलन कैंसर से बचाता है। स्ट्रेस को भी दूर करने में इसे महारत हासिल है।

प्रेगनेंट महिला को कैल्शियम प्रदान करने के लिए शतावरी के फायदे:-

प्रेगनेंसी के दौरान गर्भ में बच्चे के विकास के लिए गर्भवती महिलाओं का बहुत अधिक मात्रा में कैल्शियम की आवश्यकता पड़ती है। यह एक आवश्यक मिनरल है जो शरीर, दांत और हड्डियों के विकास एवं समुचित क्रिया के लिए जरूरी होता है। यह भ्रूण के विकास, हड्डियों के बनने में तो सहायता करता ही है साथ में भ्रूण में हड्डियों के असामान्य विकास (abnormal development) को भी रोकता है। यही कारण है कि कैल्शियम से समृद्ध होने के कारण गर्भवती महिलाएं शतावरी का सेवन करती हैं।

स्तनों में दूध बढ़ाने के लिए शतावरी का सेवन:-

  • कई महिलाओं को मां बनने के बाद स्तनों में दूध की कमी की शिकायत होती है। ऐसी स्थिति में महिलाएं 10 ग्राम शतावरी के जड़ के चूर्ण (shatavari powder) को दूध के साथ सेवन करें। इससे स्तनों में दूध की वृद्धि होती है। इसलिए डिलीवरी के बाद भी शतावरी के फायदे महिलाओं को मिलना उनके सेहत के लिए अच्छा होता है।
  • 1-2 ग्राम शतावरी के जड़ से बने पेस्ट का दूध के साथ सेवन करें। इससे स्तनों में दूध अधिक होता है।
  • इसी तरह शतावरी को गाय के दूध में पीस कर सेवन करें। इससे दूध स्वादिष्ट और पौष्टिक भी हो जाता है।

सेक्सुअल पॉवर (स्टेमना) को बढ़ाने के लिए शतावरी का सेवन:-

  • कई लोग मर्दानगी ताकत की कमी, या सेक्सुअल स्टेमना की कमी से भी परेशान देखे जाते हैं। ऐसे व्यक्ति शतावरी के इस्तेमाल से फायदा ले सकते हैं। इसमें शतावर को पका कर सेवन करें।
  • इसके अलावा दूध के साथ शतावरी चूर्ण की खीर बनाकर खाने से भी सेक्सुअल स्टेमना में वृद्धि होती है।

नाक के रोग में शतावरी का प्रयोग फायदेमंद:-

नाक की बीमारियों में 5 ग्राम शतावरी चूर्ण (shatavari powder) को 100 मिली दूध में पका लें। इसे छानकर पीने से नाक के रोग खत्म हो जाते हैं। शतावर चूर्ण के फायदे नाक संबंधी रोगों के उपचार के लिए बहुत ही लाभकारी होते हैं।

आंख के रोग में शतावरी का इस्तेमाल:-

5 ग्राम शतावरी जड़ को 100-200 मिली दूध में पका लें। इसे छानकर पीने से आंख के रोगों में लाभ होता है।
पुराना घी, त्रिफला, शतावरी, परवल, मूंग, आंवला, तथा जौ का रोज सेवन करें। इससे आंखों के रोग में लाभ (shatavari benefits) होता है।

बुखार में शतावरी से लाभ:-

शतावर और गिलोय के बराबर-बराबर भाग के 10 मिली रस में थोड़ा गुड़ मिलाकर पिएं। इससे बुखार में लाभ होता है। 20-40 मिली काढ़ा में 2 चम्मच मधु मिलाकर पीने से बुखार में लाभ होता है।

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पुरानी पथरी के रोग में शतावरी का इस्तेमाल:-

पथरी की बीमारी से परेशान मरीज 20-30 मिली शतावरी के जड़ से बने रस में बराबर मात्रा में गाय के दूध को मिलाकर पिएं। इससे पुरानी पथरी भी जल्दी गल जाती है।

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Satya Sharma

मैं अंग्रेजी दवाओं के मुकाबले घरेलु नुस्खों, आयुर्वेद और देसी इलाज को ज्यादा महत्चपूर्ण और कारगर मानती हूँ. सही खान-पान से और नियमित दिनचर्या से वैसे ही बीमारियों से बचा जा सकता है. अंग्रेजी दवाओं के दुष्प्रभाव से बचाने और भारतीय चिकित्सा पद्दति को बढ़ावा देने के लिए मेरी वेबसाइट से जुड़िये और अपने दोस्तों को भी इसके बारे में बताइए.

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