RO का पानी है अंग्रेजी दवा जैसा – फायदों से ज्यादा हैं नुकसान! अगर आप पीते हैं तो ये पढ़ लीजिए!

जल ही जीवन है यह कहना गलत नहीं होगा। खाने के बिना इंसान कई कई दिनों तक ज़िंदा रह सकता है, लेकिन बिना पानी पिए शायद कुछ दिन भी नहीं।

पानी सिर्फ प्यास बुझाने के ही काम नहीं आता बल्कि यह खाना बनाने, कपड़े धोने, नहाने, खेती-बाड़ीके काम भी आता है। सिर्फ पानी का होना ही काफी नहीं है बल्कि पानी का साफ़ होना भी बहुत जरूरी है।

पानी में कई तरह के नुकसान पहुंचाने वाले बैक्टीरिया और अशुद्धियां होती हैं। यह उलटी, दस्त, टाइफाइड जैसी अन्य बिमारियों का कारण बन सकती हैं। गंदे पानी से नहाने से त्वचा के रोग भी हो सकते हैं।

क्या है साफ़ पानी का पैमाना?

पानी में टी.डी.एस (TDS) की मात्रा का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। पानी में कई तरह के खनिज जैसे मैग्नीशियम, कैल्शियम, सोडियम आदि घुले आते हैं। पीने के पानी में टी.डी.स की मात्रा 500 मि.ग्राम प्रति लीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। 100-150 का स्तर पीने के पानी के लिए सबसे बेहतरीन माना गया है।

कैसे हो पानी साफ़?

पानी को साफ़ करने का सदियों से चला आ रहा तरीका है – छानना! इसमें आप किसी छलनी या सूती कपडे से पानी को छान लेते हैं बस.

लेकिन इससे आप सिर्फ कंकड़ या मिट्टी तो छान सकते हो, लेकिन कीटाणु नहीं. उसके लिए आपको पानी को उबलने का तरीका अपनाना पड़ता है.

आज कल बढ़ते प्रदूषण से पानी भी अछूता नहीं है. पानी को सिर्फ उबाल लेना ही काफी नहीं है.

प्रदूषण इस कदर पानी में मिल गया है कि उसमें मैग्नीशियम, पोटासियम जैसे तत्व मिल जाते हैं.

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ये आपकी सेहत और जीवन दोनों के लिए भयानक खतरा हैं. ऐसे में किसी ऐसी तकनीक की ज़रूरत है जो इन तत्वों को भी पानी से निकाल सके.

इसी के लिए वैज्ञानिकों ने इजात की है RO यानि रिवर्स ओसमोसिस की तकनीक. जो पानी से अनावश्यक तत्व निकल देती है.

क्या है आर ओ सिस्टम (RO System) : –

पिछले कुछ सालों से बाजार में पानी को साफ़ करने की तकनीक मौजूद है इस से पानी शुद्ध तो हो जाता है,लेकिन उसमे मौजूद जरूरी मिनरल्स भी नष्ट हो जाते हैं। ऐसे में आजकल ओआरपीएच तकनीक वाले आरओ विकसित किये गए हैं, जिसके इस्तेमाल पानी तो शुद्ध होता ही है साथ ही यह पानी की गुणवत्ता को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचाते।

RO का पानी अंग्रेजी दवा की तरह है : –

अगर ऐसा कहें तो गलत नहीं होगा. यह सच है कि RO से पानी में मौजूद हानिकारक तत्व मिट जाते हैं. लेकिन जो ज़रूरी मिनरल्स हैं वो भी नष्ट हो जाते हैं.

जैसे अंग्रेजी दवाएं असर तो करती हैं लेकिन उनके साइड इफेक्ट्स की लिस्ट भी लम्बी है. ऐसे ही RO पानी को वैसे तो साफ़ कर देता है जो कि अच्छा है, लेकिन उसके ज़रूरी तत्व भी नष्ट कर देता है तो ये नुक्सान दायक है.

WHO की रिपोर्ट : –

विश्व स्वास्थ्य संगठन यानि कि WHO ने हाल ही में इस बात का खुलासा किया है कि उनके शोध के मुताबिक RO का पानी या सड़क पर मिलने वाला बोतल बंद पानी जिसमें RO का ही पानी भरा जाता है, आपके स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है.

लम्बे समय तक इस पानी का सेवन करने से आपके शरीर में ज़रूरी मिनरल्स की कमी हो जाती है.

ऐसे में आपको ये तो लगता है कि आप साफ़ पानी पी रहे हैं जो आपको तुरंत होने वाले इन्फेक्शन या बीमारियों से बचाता है, लेकिन बुढ़ापे में जा कर हड्डियाँ और जोड़ जवाब दे जाते हैं.

कौनसी बीमारियों का है ख़तरा?

आर ओ के पाने के लगातार सेवन से हमारे शरीर में जो मिनरल्स की कमी हो जाती है उससे भविष्य में कईं बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. इनमें सबसे आम पायी जाने वाली बीमारियाँ है :

  • हृदय सम्बन्धी विकार
  • थकान
  • मानसिक कमजोरी
  • मांसपेशियों में ऐंठन
  • सर दर्दबदन दर्द
  • जोडों में तकलीफ़
  • त्वचा सम्बन्धी रोग

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तो फिर करें क्या?

अब बिना पानी के रहा भी नहीं जा सकता और न ही गन्दा पानी पिया जा सकता है. तो फिर आखिर किया क्या जाये?

वैज्ञानिक दिनों दिन इस खोज में लगे हुए हैं कि इस समस्या से कैसे निजात मिले. हाल ही में ऐसे आर ओ बाज़ार में आने लगे हैं जो न सिर्फ रिवर्स ओसमोसिस बल्कि यू वी और क्लोरिन फ़िल्टर का इस्तेमाल करते हैं.

इससे आर ओ की प्रक्रिया में नष्ट हुए मिनरल्स पानी में वापस मिला दिए जाते हैं. और ये पानी पीने से शरीर में इन मिनरल्स की कमी होने से रोका जा सकता है.

जब भी आप आर ओ खरीद रहे हों ये ध्यान रखें कि आपको मिनरल्स वापस मिला देने वाला आर ओ ही खरीदना है.

इसके अलावा उबाले हुए पानी में क्लोरिन का इस्तेमाल करके भी पी सकते हैं.

विनम्र विनती :

हम चाहते हैं कि हर भारतीय अंग्रेजी दवाओं की बजाय घरेलु नुस्खों और आयुर्वेद को ज्यादा अपनाये.

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Satya Sharma

मैं अंग्रेजी दवाओं के मुकाबले घरेलु नुस्खों, आयुर्वेद और देसी इलाज को ज्यादा महत्चपूर्ण और कारगर मानती हूँ. सही खान-पान से और नियमित दिनचर्या से वैसे ही बीमारियों से बचा जा सकता है. अंग्रेजी दवाओं के दुष्प्रभाव से बचाने और भारतीय चिकित्सा पद्दति को बढ़ावा देने के लिए मेरी वेबसाइट से जुड़िये और अपने दोस्तों को भी इसके बारे में बताइए.

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