fbpx

अगर इस्तेमाल करते हैं डिओडोरेंट तो हो जाइये सावधान! – ज़रूर पढ़िए!

पसीने की बदबू से राहत के लिए अगर आप अक्सर डियोडोरेंट या परफ्यूम का इस्तेमाल करते हैं तो इस जानकारी के बाद आप इनसे दूरी बना ही लेंगे।

डेली मेल में प्रकाशित खबर की मानें तो पसीने की दुर्गंध दूर करने के लिए इस्तेमाल में लाए जाने वाले परफ्यूम व डियोडोरेंट न केवल पसीने के ग्लैंड को प्रभावित करते हैं, बल्कि शरीर की टॉक्सिफिकेशन की प्राकृतिक प्रक्रिया को भी नुकसान पहुंचाते हैं।

अलग-अलग अध्ययनों के आधार पर शोध में माना गया है कि शरीर से पसीना निकलना बहुत अधिक जरूरी है और डियो इसमें अवरोध पैदा कर सेहत से जुड़ी कई समस्याओं को जन्म देते हैं।

क्यों जरूरी है पसीना

शोधकर्ताओं ने माना है कि जब हमें पसीना आता है तो शरीर का तापमान सामान्य होता है और शरीर को प्राकृतिक तौर पर ठंडक मिलती है। पसीना आने का मतलब यह भी है कि शरीर में मौजूद ग्लैंड अच्छी तरह काम करते हैं।

हमारे शरीर में कई बार टोक्सिक अधिक हो जाते हैं जो पसीने के रास्ते डीटॉक्सिफाई होते हैं। लॉफबोरो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का मानना है कि अगर आपको पसीना नहीं आएगा तो आधे घंटे शारीरिक श्रम करने के बाद आपके शरीर का तापमान बहुत अधिक हो सकता है।

उन्होंने माना कि पसीना कम करने के लिए इस्तेमाल में लाए जाने वाले खुशबूदार उत्पाद पसीने की स्वाभाविक प्रक्रिया में बाधा पहुंचाते हैं, जिससे शरीर में आर्सेनिक, कैडमियम, लीड और मरकरी जैसे तत्व इकट्ठा हो सकते हैं।

डीयो और परफ्यूम के और भी हैं नुकसान

  • अगर आप सोचते हैं कि पसीने की दुर्गंध को दूर करने के लिए डियो लगाना बहुत जरूरी है तो जान लें कि परफ्यूम पसीने की महक को अधिक दुर्गंधित कर देते हैं।

  • चूंकि ये पसीना निकलने की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं इसलिए अंदर रहने वाला पसीना और भी अधिक दुर्गंधित होता है और पसीने की बदबू की समस्या और भी बढ़ जाती है।
  • पसीना शरीर में तब निकलता है जब हम तनाव, डर घबराहट या सेक्स की इच्छा से प्रभावित होते हैं। कसरत के दौरान शरीर में सेक्स हार्मोन बढ़ते हैं इसलिए पसीना अधिक निकलता है। ऐसे में पसीने की दुर्गंध से छुटकारे के लिए डियो का इस्तेमाल कामेच्छा को भी प्रभावित करता है।
  • इसके इस्तेमाल से पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर और महिलाओं में ब्रैस्ट कैंसर होने के चांस बढ़ जाते हैं. ऐसा शोधकर्ताओं द्वारा चेतावनी दी गयी है.
  • इसके इस्तेमाल से दमा होने की सम्भावना बढ़ जाती है. दमा के रोगियों को तो इसके इस्तेमाल से गंभीर नुक्सान हो सकता है.

जैसे छोटी छोटी बातें ही सेहत के मामले में बड़ी महत्वपूर्ण होती है, ठीक वैसे ही एक छोटा सा क्लिक करके इस पोस्ट को अपने दोस्तों से शेयर कीजिये और अछि जानकारी को ज़्यादा लोगों तक पहुचाइए!

हमें सहयोग देने के लिए हमारे फेसबुक (Facebook) पेज – Khabar Nazar पर Like ज़रूर करें!

सुखी और संतुष्ट वैवाहिक जीवन के लिए अपनी टाइमिंग बढ़ाएं,
घर बैठे पूरे भारत में 100% आयुर्वेदिक डॉ नुस्खे हॉर्स किट की गुप्त डिलीवरी पाएं!

इस लिंक पर क्लिक करके सुरक्षित आर्डर करें!
http://whatslink.co/Horsekit

Satya Sharma

मैं अंग्रेजी दवाओं के मुकाबले घरेलु नुस्खों, आयुर्वेद और देसी इलाज को ज्यादा महत्चपूर्ण और कारगर मानती हूँ. सही खान-पान से और नियमित दिनचर्या से वैसे ही बीमारियों से बचा जा सकता है. अंग्रेजी दवाओं के दुष्प्रभाव से बचाने और भारतीय चिकित्सा पद्दति को बढ़ावा देने के लिए मेरी वेबसाइट से जुड़िये और अपने दोस्तों को भी इसके बारे में बताइए.

Leave a Reply