लकवा का अटैक आने पर ये उपाय करने से आप बच सकते है लकवे से

दोस्तों आज मैं आपको लकवा या पैरालिसिस के बारे में जानकारी देना चाहती हूँ.

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किसी अंग की मांसपेशियों का पूर्ण रूप से कार्य ना कर पाना पैरालिसिस या लकवा मारना या पक्षाघात कहते है इस रोग को ठीक किया जा सकता है बशर्ते मरीज अगर हिम्मत न हारे तो।

पैरालिसिस या लकवा का अटैक कभी भी आ सकता है जब उस अंग की सवेदना कमजोर होगी तो लकवा का सही समय पर इलाज न होने से रोगी एक अपाहिज की जिन्दगी जीने को मजबूर हो जाता है ,इसीलिए समय रहते ही पैरालिसिस या लकवा मारना या पक्षाघात का उपचार करना जरुरी है।

आपने बहुत से लोगो के बारे में सुना होगा की अचानक ही उनके शरीर को लकवा हो गया या लकवे का अटैक आ गया जिसके कारण उसके किसी अंग या मुँह का टेढ़ा हो जाना उसका ना हिलना जैसा हो सकता है.

लकवा (Paralysis) एक प्रकार से गंभीर बीमारी है जिससे मरीज के किसी अंग शून्य हो जाता है। लकवा को अंग्रेजी में पैरालिसिस भी कहते हैं, जो अधिकतर 50 वर्ष से अधिक उम्र के इंसान को होता है। ऐसा नहीं है कि यह केवल 50 वर्ष की उम्र में ही हो बल्कि अगर कुछ सावधानी न बरती जाये तो लकवा किसी भी उम्र के मनुष्य को हो सकती है।

लेकिन गंभीर बीमारी के कारण लोगों को यह समस्या कम उम्र में भी हो जाती है। शरीर के किसी हिस्से में खून का थक्का जमने के कारण कोशिकाओं और मस्तिष्क में रक्तप्रवाह रूक जाता है, जिसके कारण यह समस्या हो जाती है। लकवा मारने पर इंसान के शरीर का वो हिस्सा काम करना बंद कर देता है।

अगर समय रहते रोगी का इलाज कर दिया जाए तो इससे छुटकारा पाया जा सकता है। आज हम आपको बताएंगे कि लकवा मारने पर तुरंत क्या उपाय करने से रोगी को इस समस्या से बचाया जा सकता है।

लकवा होने के कारण-

अंग का दबना :-

लकवा होने का कारण किसी भी शरीर के अंग का दबना भी हो सकता है यदि आपके शरीर का कोई अंग दब जाये तो उस जगह पर रक्त का प्रवाह ठीक से नहीं हो पाता, जिसकी वजह से हमारा दिमाग उस हिस्से पर रक्तसंचालन को रोक देता है। रक्तसंचालन रुकने के बाद उस हिस्से पर तंत्रिका तंत्र भी शून्य हो जाता है

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ज्यादा तनाव में रहने से :-

कभी-कभी ज्यादा तनाव में रहने से मस्तिष्क में खून जम जाता है, जिसके कारण पैरालिसिस होने की  संभावना बढ़ जाती है। इसलिए ज्यादा चिंता या तनाव में नहीं रहना चाहिए।

लकवा होने पर करे ये उपाय –

लहसुन-

लकवा होने पर मरीज को तुरंत एक चम्मच शहद में 2 लहसुन मिलकर खिलाये. इससे लकवा से छुटकारा मिल सकता है।

कलौंजी का तेल-

कलौंजी के तेल से लकवे वाली जगह पर मालिश करें। इस से आर्म मिलता है.

लकवा होने पर करे ये रामबाण इलाज-

अगर मेरा कोई भाई बहिन लकवा (पेरालाइसिस) से पीड़ित है तो कहीं जाने की जरूरत नहीं है। अगर शरीर का कोई अंग या शरीर दायीं तरफ से लकवाग्रस्त है तो उसके लिए व्रहतवातचिंतामणि रस (वैदनाथ फार्मेसी) की ले ले। उसमे छोटी-छोटी गोली (बाजरे के दाने से थोड़ी सी बड़ी) मिलेंगी। उसमे से एक गोली सुबह ओर एक गोली साँय को शुद्ध शहद से लेवें।

अगर कोई भाई बहिन बायीं तरफ से लकवाग्रस्त है उसको वीर-योगेन्द्र रस (वैदनाथ फार्मेसी) की सुबह साँय एक एक गोली शहद के साथ लेनी है।

अब गोली को शहद से कैसे ले..? उसके लिए गोली को एक चम्मच मे रखकर दूसरे चम्मच से पीस ले, उसके बाद उसमे शहद मिलकर चाट लें। ये दवा निरंतर लेते रहना है, जब तक पीड़ित स्वस्थ न हो जाए।

पीड़ित व्यक्ति को मिस्सी रोटी (चने का आटा) और शुद्ध घी (मक्खन नहीं) का प्रयोग प्रचुर मात्र मे करना है। शहद का प्रयोग भी ज्यादा से ज्यादा अच्छा रहेगा।

लाल मिर्च, गुड़-शक्कर, कोई भी अचार, दही, छाछ, कोई भी सिरका, उड़द की दाल पूर्णतया वर्जित है। फल मे सिर्फ चीकू ओर पपीता ही लेना है, अन्य सभी फल वर्जित हैं।

शुरुआती दिनों मे किसी भी मालिश से परहेज रखें। तब तक कोई मालिश न करें जब तक पीड़ित कम से कम 60% तक स्वस्थ न हो जाए।

ये दवा लाखों पीड़ित व्यक्तियों के लिए जीवनदायिनी रही है। जो आज स्वस्थ जीवन जी रहे है।

 

हम चाहते हैं कि हर भारतीय अंग्रेजी दवाओं की बजाय घरेलु नुस्खों और आयुर्वेद को ज्यादा अपनाये.

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