नस पर नस चढ़ना के कारण लक्षण तथा घरेलु उपचार

नस पर नस चढ़ना एक आम समस्या बन चुकी हैं। क्या आप जानते है कि इस बीमारी के क्या नुक्सान हो सकते हैं। कई बार रात को सोते समय टांगों में एंठन की समस्या होती है। ये नस पर नस चढ़ने के कारण ही होता है।  इस रोग में टांगों तथा पिंडलियों में हल्का दर्द महसूस होता है। इसमें पैरों में दर्द, जलन, पैर सुन्न होना, झनझनाहट तथा सुई चुभने जैसा महसूस होता है।

हमारे शरीर में जिन जिन जगहों पर रक्त प्रवाह हो रहा है। उसके साथ साथ बिजली भी प्रवाहित की जा रही है। इसे हम बायो इलेक्ट्रिसिटी कहते हैं। रक्त हमारी धमनियों तथा शिराओं में बहता है। जबकि  करंट तंत्रिकाओं में चलता रहता है। शरीर के जिस हिस्से में रक्त नहीं पहुंच पाता शरीर का वह हिस्सा सुन्न हो जाता है। तथा उन मांसपेशियों पर नियंत्रण नहीं रहता है। उस स्थान पर हाथ रखने पर ठंडा लगता है।

इसी प्रकार शरीर के जिस हिस्से में बायो इलेक्ट्रिसिटी नहीं पहुंच रही है। शरीर के उस हिस्से में दर्द पैदा हो जाता है। उस जगह हाथ रखने पर गर्म लगता है। यह दर्द कार्बोनिक एसिड  के कारण होता है। जो बायो इलेक्ट्रिसिटी की कमी के कारण उस मांसपेशी में अपने आप उत्पन्न होता है। उस मसल में जितनी अधिक बायोइलेक्ट्रिसिटी की कमी होगी। उतना ज्यादा ही कार्बोनिक एसिड पैदा होता है। तथा उतना अधिक दर्द भी पैदा होता है। जब उस प्रभावित मांसपेशी में बायो इलेक्ट्रिसिटी जाने लगती है तो वहां से कार्बन घुलकर रक्त मे मिल जाता है। दर्द बंद हो जाता है। रक्त मे घुले इस कार्बोनिक एसिड को शरीर की रक्त शोधक प्रणाली पसीने और पेशाब से बाहर निकाल देती है।

नस पर नस चढ़ना है तो एक बीमारी पर कब कहाँ कौन सी नस चढ़ जाये कोई नहीं कह सकता। हमारे शरीर में 650 के करीब मांसपेशियां हैं!। जिनमे से 200 में मुस्कुलर स्पासम या मसल नोट का दर्द हो सकता हैं। मस्कुलर स्पाजम या मसल नोट के कारण होने वाले दर्द इस प्रकार है :-

घुटने से नीचे, घुटने के पीछे, टांग के अगले हिस्से, एडी, पंजे, नितंब (हिप), दोनो कंधो, कमरदर्द, कंधे, गर्दन और छाती, कोहनी, बाजू, ऊँगली या अंगूठे, पूरी टांग, घुटने, जबड़े में और कान के आस पास, आधे सिर, पैर के अंगूठे आदि सिर से पांव तक शरीर में बहुत सारे दर्द होते हैं।

नस पर नस चढ़ना बीमारी होने के कारण :-

-ज्यादा मधुमेह के कारण

-शरीर में जल, खून में सोडियम, पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नीशियम कम होने पर

-पेशाब ज्यादा करने वाली डाययूरेटिक दवाओं जैसे लेसिक्स खाने के कारण शरीर में जल, खनिज लवण की मात्रा कम होने के कारण।

मधुमेह, ज्यादा शराब पीने से, कमजोरी, पौष्टिक भोजन ना लेने से, नसों की कमजोरी।

-कुछ हृदय रोग की दवायें भी कई बार इसका कारण होती हैं।

-कोलेस्ट्रॉल घटाने वाली दवा के सेवन से।

-ज्यादा व्यायाम करने, खेलने तथा कठोर श्रम करने से।

-एक ही स्थिति में देर तक पैर मोड़ने के कारण पेशियों की थकान के कारण हो सकता है।

-पैर की धमनियों में कोलेस्ट्रॉल जमा होने से।

-पैरों की स्नायुओं का मधुमेह से प्रभवित होने पर।

-अधिक धुम्रपान, शराब पीना, पोष्क तत्वों की कमी तथा संक्रमण से।

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नस पर नस चढ़ना बीमारी होने के लक्षण :-

-हाथ थोड़ा दबते ही सुन्न होने लगते हैं।

-सीढ़ी चढ़ते हुए घुटने से नीचे के हिस्सों में खिचांव आना।

-गर्दन में ताकत की कमी महसूस होना।

-गर्दन में दर्द होना।

-शरीर में दर्द के वेग आना।

-याददाश्त कम हो जाना।

-चलने पर सन्तुलन बिगड़ना।

-हाथ पैरों का कम्पन्न

-जांघ व घुटनों के नीचे Muscle Cramp होना।

-शरीर में लेटते हुए धक धक की आवाज होना।

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-कोई भी कार्य करते हुए डर लगना।

हृदय की धड़कन बढ़ी रहना।

-शरीर में सुईंया चुभना।

-सर्दी अथवा गर्मी का अधिक असर होना।

-चलने फिरने में कष्ट प्रतीत होना।

-काम के समय उत्तेजना (Anxiety) चिड़चिड़ापन (Irritation) या निराशा (Depression)  होना।

-पर्याप्त नींद न ले पाना।

-शीघ्र ही थकान का अनुभव होना।

-अंगों में फड़फड़ाहट होते रहना।

-मानसिक क्षमता का कम होना।

-सोते समय पैरों में नस पर नस चढ़ना या अचानक तेज दर्द होना।

-पैरों के तलवों में जलन रहना।

-हाथ-पैर ठण्डे रहना।

नस पर नस चढ़ना के घरेलू उपचार :-

-जिस पैर की नस चढ़ी है। उसी ओर के हाथ की बीच की ऊँगली के नाखून के नीचे के भाग को दबाए और छोड़ें। जब तक ठीक न हो जाए।

ये उपाय करें :-  लंबाई में शरीर को दो भागों में चिन्हित करें। अब जिस भाग में नस चढ़ी है।उस भाग के विपरीत भाग के कान के निचले जोड़ पर उंगली से दबाते हुए उंगली को हल्का सा ऊपर नीचे की तरफ करे। ऐसा 10 सेकेंड तक करते रहें। नस उतर जाएगी।

-पैरों के नीचे मोटा तकिया रखकर सोएं। आराम करें। पैरों को ऊंचाई पर रखें।

-प्रभावित जगह पर बर्फ की ठंडी सिकाई करे। दिन में 3-4 बार यह 15 मिनट करे।

-ऎंठन वाली पेशियों की मालिश करें।

-पैरों में इलास्टिक पट्टी बांधे जिससे पैरों में खून जमा न हो पाए।

-मधुमेह या उच्च रक्तचाप (High BP) से ग्रसित हैं। तो परहेज, उपचार से नियंत्रण करें।

-शराब, तंबाकू, सिगरेट, नशीले पदार्थो का सेवन न करें।

-आरामदायक तथा मुलायम जूते पहनें।

-अपना वजन कम करें। रोज सैर पर जाएं। इससे टांगों की नसें मजबूत होती हैं।

-फाइबर युक्त भोजन करें जैसे चपाती, ब्राउन ब्रेड, सब्जियां व फल।

नस पर नस चढ़ना के रोगी के लिए भोजन :-

भोजन में नीबू पानी, नारियल का पानी, फलों जैसे मौसमी, अनार, सेब, पपीता केला को शामिल करें। सब्जिओं में पालक, टमाटर, सलाद, फलियाँ, आलू, गाजर, चकुँदर का सेवन करें। हर रोज अखरोट, पिस्ता, बादाम, किशमिश खाएं।

हम चाहते हैं कि हर भारतीय अंग्रेजी दवाओं की बजाय घरेलु नुस्खों और आयुर्वेद को ज्यादा अपनाये.

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Satya Sharma

मैं अंग्रेजी दवाओं के मुकाबले घरेलु नुस्खों, आयुर्वेद और देसी इलाज को ज्यादा महत्चपूर्ण और कारगर मानती हूँ. सही खान-पान से और नियमित दिनचर्या से वैसे ही बीमारियों से बचा जा सकता है. अंग्रेजी दवाओं के दुष्प्रभाव से बचाने और भारतीय चिकित्सा पद्दति को बढ़ावा देने के लिए मेरी वेबसाइट से जुड़िये और अपने दोस्तों को भी इसके बारे में बताइए.

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