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क्या आप जानते है कि महिलाएं सिन्दूर क्यों लगाती हैं? – जानिए इसके अनेक कारण हैं!

हिन्दू धर्म में ऐसी मान्यता है कि सिंदूर लगाने से स्त्री के पति के आयु में वृद्भि होती है और स्त्री के सौभाग्य की दरवाजें खुलते हैं।

आइए जानते हैं कि हिन्दू धर्म में इस मान्यता के पीछे धार्मिक औऱ वैज्ञानिक कारण क्या हैं। सबसे पहले आपको बताते है इससे जुड़े कुछ वैज्ञानिक कारण और फिर दुसरे कारणों पर भी प्रकाश डाला गया है –

वैज्ञानिक कारण

सिंदूर के कारण नहीं दिखती झुुर्रिया

सिंदूर में पारा होने की वजह से चेहरे पर जल्दी झुर्रिया नहीं पड़ती और चेहरा सुन्दर और आकर्षक दिखता है ।इससे महिलाओं के चेहरे पर आयु वृद्धि के संकेत दिखते हैं ।

महिलाओं का सिंदूर लगाने वाला स्थान पुरुषों के मुकाबले ज्यादा संवेदनशील और कोमल होता है। सिंदूर में पारा धातु पाया जाता है जिसे माथे पर लगाने से विधुत ऊर्जा का नियंत्रण होती है। इससे नकारात्मक शक्ति दूर होती है और सिर में दर्द ,अनिद्रा और अन्य मस्तिष्क से जुड़े रोग दूर होते हैं।

धार्मिक कारण

हिन्दू धर्म में ऐसी मान्यता है कि अगर पत्नी के बीच मांग में सिन्दूर लगा हुआ है तो उसके पति की अकाल मृत्यु नहीं हो सकती और हर संकट में पति को यह सुरक्षित रखता है। दिवाली और नवरात्र के दौरान पती द्वारा पत्नी के मांग में सिन्दूर लगाना काफी शुभ माना जाता है।

सामाजिक कारण

विवाहित महिलाओं को सिन्दूर लगाये जाने का एक प्राचीन कारण यह भी है कि विवाह के बाद उनके जीवन में बहुत बदलाव आ जाते हैं. ऐसे में ऊनि वेशभूषा और रहन सहन सब बदल जाता है. ताकि सबको पता चले कि महिला विवाहित है, इसके लिए भी सबसे पहले दिखने वाले चेहरे के भाग यानि मस्तक पर सिन्दूर लगाया जाता था. वही प्रथा अब तक भी चली आ रही है.

सुन्दरता के लिए

सिन्दूर ज़्यादातर लाल रंग का लगाया जाता है. कुछ लोगों में हलके लाल, नारंगी और पीला सिन्दूर लगाने का भी प्रचलन है. ऐसा इसलिए भी है क्योंकि सिन्दूर लगाने से महिला के सौंदर्य में बढ़ावा होता है. सिन्दूर लगाने से मतलब महिला को सजाने सवारने से भी है. इसलिए हर समय विवाहित महिला सिन्दूर लगा कर रखती है ताकि वेह और अधिक सुन्दर दिखे.

पौराणिक कारण

हिन्दू धर्म में सिन्दूर का उल्लेख रामायण काल से ही मिलता है। रामायण की पात्र सीता माता सिन्दूर का प्रयोग किया करती थी। एक बार हनुमान जी ने सीता माता से पूछा था कि आप सिन्दूर क्यों लगाती हैं इस पर सीता माता ने कहा था कि इससे भगवान राम को खुशी मिलती है। खुशी मिलने के कारण शरीर स्वस्थ रहता है, जिसके कारण आयु में वृद्धि होती है ।

सामुंद्रिक शास्त्र कहता है कि सिन्दूर लगाने से सुहागन स्त्री की सुन्दरता में वृद्भि होती है।

भारतीय संस्कृति में स्त्रियों के सोलाह श्रृंगार में सिंदूर का विशेष महत्व है, हिंदू धर्म में सिंदूर को अखंड सौभाग्य की निशानी माना जाता है। सिंदूर विवाहित महिलाओं का प्रतिक होता है, हिंदू मान्यताओं के अनुसार जो महिलाएं शादीशुदा होने के बावजूद भी सिंदूर नहीं ंलगाती उन्हें अधूरा माना जाता है। इसके अलावा इसको ना लगाना अशुभ भी माना गया है। बहुत सी महिलाएं ऐसी भी है जो सिंदूर लगाती तो हैं मगर क्यों लगाती है इस बात से वह आज भी अंजान हैं। लेकिन आज हम आपको सिंदूर लगाने की धार्मिक मान्यताएं और वैज्ञानिक तथ्यों के बारे में बतानें जा रहे है।

हिन्दू धर्म में सिंदूर को  देवी पार्वती का प्रतीक माना गया है। देवी पार्वती ने अपने पति के मान-सम्मान के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया था। इसलिए जो महिलाएं सिंदूर लगाती हैं मां पार्वती उसके पति की रक्षा हर संकट से करती हैं।साथ ही उस स्त्री को मां पार्वती का अखंड सौभाग्यवती का आशिर्वाद भी प्राप्त होता है.

सिंदूर को सिर पर लगाने से मां लक्ष्मी स्वयं विराजमान होती हैं इसलिए जो महिलाएं सिंदूर लगाती है वह स्त्री मां लक्ष्मी को सम्मान देती है। इससे मां की कृपा पति पत्नी के दाम्पत्य जीवन पर सदा बनी रहती है और दोनों के संबध मधुर रहते है।

हिंदू धर्म में लाल रंग को शक्ति और सौभाग्य का प्रतीक माना गया है। मां लक्ष्मी को सम्मान देने के लिए मांग में सिंदूर लगाया जाता है जिससे घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

वैज्ञानिक तथ्यों के मुताबिक मांग में सिंदूर भरने से मन शांत रहता है साथ ही सिंदूर से महिला का स्वास्थ भी अच्छा रहता है। ये रक्तचाप जैसी समस्या को नियंत्रण में रखता है। सिंदूर में मर्करी यानि पारा पाया जाता है जिसके लिक्विड रुप में होने के कारण यह स्त्री को शीतलता देता है और इससे दिमाग तनावमुक्त भी रहता है।

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Satya Sharma

मैं अंग्रेजी दवाओं के मुकाबले घरेलु नुस्खों, आयुर्वेद और देसी इलाज को ज्यादा महत्चपूर्ण और कारगर मानती हूँ. सही खान-पान से और नियमित दिनचर्या से वैसे ही बीमारियों से बचा जा सकता है. अंग्रेजी दवाओं के दुष्प्रभाव से बचाने और भारतीय चिकित्सा पद्दति को बढ़ावा देने के लिए मेरी वेबसाइट से जुड़िये और अपने दोस्तों को भी इसके बारे में बताइए.

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