हकलाना, तुतलाना तथा रुक-रुक कर बोलने के कारण और इसका सबसे आसान घरेलू उपाय

जल्दी-जल्दी शब्दों को पूर्ण रूप से न बोल पाना तथा किसी बात को बोलते समय बार-बार दोहराना या बोलते-बोलते रुक जाना आदि हकलापन या तोतलापन कहलाता है।

हकलाने वाले व्यक्ति कुछ अक्षरों जैसे प, ब, ट, ड, ग, क आदि ठीक तरह से नहीं बोल पाते, जिसके कारण शब्दों को बोलने में हकलाना, तुतलाना तथा रुक-रुक कर बोलना आदि परेशानी होने लगती है। कुछ बच्चे या व्यक्ति जीभ मोटी होने के कारण भी तुतलाते रहते हैं।

लोग उन का मजाक बनाते रहते है और इस की वजह से वो खुद को ले कर शर्मिंदगी महसूस करते है

हकलाना, तुतलाना तथा रुक-रुक कर बोलने के कारण-

बोलने में काम आने वाली पेशियों के  स्नायुओं का नियंत्रण ख़राब होने की वजह से आपको बोलने में दिक्कत आती रहती है

जिसके कारण बोलने में तुतलापन या हकलापन उत्पन्न होता है। इस प्रकार के रोग जीभ के अधिक मोटा होने से भी होता है।

कई बार आपको जल्दी जल्दी बोलने की आदत होती है जिस वजह से भी आपको तुतलाने की आदत हो जाती है और आप कुछ शब्दों को भी बीच में बोलना भूल जाते है खैर जल्दी जल्दी बोलने की तो आपको आदत ह सकती है इसे हम तुतलाना या हकलाना नही कह सकते

हकलाना, तुतलाना तथा रुक-रुक कर बोलने के लिए एक्यूप्रेशर चिकित्सा के द्वारा उपचार

  • इस चित्र में दिए गए एक्यूप्रेशर बिन्दु के अनुसार रोगी के शरीर पर दबाव (अपने हाथ के अंगूठे या पैन से चित्र में दिखाए गए हाथ के अंगूठे, हथेली, पैर के अंगूठे और पगथली, और गर्दन के पीछे के पॉइंट पर 10-15 सेकंड के लिए दबावे फिर छोड़े लगभग 15-30 मिनट, यह रोजाना दोहराये)
  • इससे हकलाना, तुतलाना या रुक-रुक कर बोलना ठीक होता है। इसके लिए किसी अच्छे एक्यूप्रेशर चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए क्योंकि एक्यूप्रेशर चिकित्सक को सही दबाव देने का अनुभव होता है। और उन के बताने से आपको समझ भी आ जायगा की आप सही जगह दबा भी रहे है या नही
  • नोट : इस बात का ध्यान रखे की दबाव सहनीय और सामान्य  हो ज्यादा असहनीय न हो।ये न हो की दबाव के चक्कर में आप अपने अंगो पर दर्द ही करते रहे

हकलाना, तुतलाना तथा रुक-रुक कर बोलने के लिए घरेेलूू उपाय-

घी :

यदि 3 से 6 ग्राम घी में रोज आप मिश्री मिलकर सुबह शाम आप इसको चाटते और उपार से गाय का दूध पीते है तो लगातार कुछ ही दिन ऐसे करने से आपको तुतलाना बंद हो जायगा

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बादाम :

रोज आप 10 से 12 बादाम पानी में भिगोकर रखे अब जब ये बादाम फूल जाये तो इनका छिलका उतर कर इन बादाम को पिस ले और इसमें 25 से ३० ग्राम माखन मिला कर खाए कुछ ही महीनो में आपका तुतलाना ठीक हो जायगा

दूध : 

हकलापन खत्म करने के लिए आपको बस ये करना ही आपको 10 ग्राम दूध और 250 ग्राम चूरन को मिलाकर रख ले अब आपको ये चूरन 2 -2 ग्राम की मात्रा में दिन में 2 बार माखन के साथ खाने से आपका हकलानापन दूर हो जाता है

दालचीनी : 

दालचीनी को रोजाना सुबह-शाम चबाने से हकलापन दूर होता है। ये एक बहुत ही सरल नुस्खा है

धनिया : 

अमलतास के गूदे और हरे धनिया को पीसकर रखें। इसके बाद इसे पानी के साथ मिलाकर लगातार 21 दिन तक कुल्ला करें। इससे जीभ पतली हो जाती है और हकलापन दूर होता है। ये नुस्खा बहुत ही कारागार है

सौंफ :

<5 ग्राम सौंफ को थोड़ा कूटकर 300 मिलीलीटर पानी में उबाल लें। उबलने पर 100 मिलीलीटर पानी बच जाने पर इसे उतारकर इसमें 50 ग्राम मिश्री तथा 250 मिलीलीटर दूध मिलाकर रोजाना सोने से पहले पीयें। लगातार कुछ दिनों तक इसके सेवन से हकलापन ठीक हो जाता है। ये नुस्खा बहुत ही आसान है

छुहारा : 

रोजाना रात को सोते समय 1 छुहारे को दूध में डालकर उबालकर पी लें। इसको पीने के 2 घंटे बाद तक पानी न पीयें। इसके रोजाना प्रयोग से तीखी, भोण्डी आवाज साफ हो जाती है।

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कलौंजी : 

आधा चम्मच कलौंजी के तेल में 2 चम्मच शहद डालकर दिन में 2 बार जीभ पर लगायें। यह कैल्शियम की कमी के कारण दांतो का टूटना, बालों का झड़ जाना तथा होठों के दर्द में लाभ होता है।

इलायची : 

हकलाहट या तुतलाहट में छोटी इलायची, कुलंजन, अकरकरा, वच तथा लौंग सभी का 25-25 ग्राम चूर्ण बनाकर रख लें। फिर इसमें 5 ग्राम कस्तूरी मिला लें। इस चूर्ण को आधा चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम, ब्राह्मणी रस के साथ 2-3 महीने तक लगातार भोजन करने के आधे घंटे बाद 3-3 ढक्कन सरस्वतारिस्ट और इतना ही पानी मिलाकर सुबह-शाम लेने से लाभ होता है।

तेजपत्ता : 

तेजपत्ता के पत्ते को नियमित रूप से कुछ दिन तक चूसते रहने से हकलापन दूर हो जाता है। रुक-रुक कर बोलने वाले या हकलाने वाले व्यक्ति को तेजपत्ता जीभ के नीचे रखने से हकलापन तथा रुक-रुककर बोलना दूर हो जाता है।

आंवला : 

बच्चे को 1 ताजा आंवला रोजाना कुछ दिनों तक चबाने के लिए देने से उनकी जीभ पतली और आवाज साफ होती है तथा उनका हकलापन और तुतलापन दूर हो जाता है। कच्चे, पके हरे आंवले को चूसकर अनेक बार सेवन करें, इससे हकलाना बंद हो जाता है।

मक्खन : 

दिन में 3 से 4 बार मक्खन में चीनी मिलाकर चाटने से जीभ के मोटी होने के कारण होने वाला तुतलापन ठीक हो जाता है। कालीमिर्च का चूर्ण बनाकर मक्खन में मिलाकर सुबह खाने से रोजाना प्रयोग से हकलाना बंद हो जाता है।

फिटकरी :

रोजाना सोते समय मूंग की दाल के बराबर फिटकरी का टुकड़ा मुंह में रखकर सोने से तुतलाने का रोग ठीक हो जाता है। फिटकरी को भूनकर रोजाना रात को सोते समय 2 ग्राम चूर्ण को जीभ पर रखें और 4-5 मिनट बाद कुल्ला कर लें। कुछ महीनों तक इसका प्रयोग करने से रोग में लाभकारी होता है।

विनम्र विनती :

हम चाहते हैं कि हर भारतीय अंग्रेजी दवाओं की बजाय घरेलु नुस्खों और आयुर्वेद को ज्यादा अपनाये.

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