गुणों की खान है हारसिंगार, इसके औषधीय लाभ जानकार हो जायेंगे हैरान!

आज मैं आपको हारसिंगार के फायदों के बारे में बताने जा रही हूँ.

हरसिंगार के फूलों से लेकर पत्त‍ियां, छाल एवं बीज भी बेहद उपयोगी हैं। इसकी चाय, न केवल स्वाद में बेहतरीन होती है बल्कि सेहत के गुणों से भी भरपूर है। इस चाय को आप अलग-अलग तरीकों से बना सकते हैं और सेहत व सौंदर्य के कई फायदे पा सकते हैं।

हिंदू धर्म में हरसिंगार का बहुत महत्व है, इसे ईश्वर की अराधना में भी एक खास स्थापन प्रदान किया गया है। इसके फूल ईश्वर की आराधना में महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं। अंग्रेजी में इसे नाइट जेस्मिन और उर्दू में इसे गुलज़ाफ़री कहा जाता है। हरसिंगार का यह वृक्ष रात की रानी के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इसके पुष्प रात के समय खिलकर वातावरण को सुगंधित करते है और झड़ जाते हैं।

हरसिंगार का वृक्ष झाड़ीनुमा या छोटा पेड़ जैसा होता है। इसे प्राजक्ता, शेफाली, शिउली आदि नामों से भी जाना जाता है। इसका वृक्ष 10 से 15 फीट ऊँचा होता है और कहीं 25-30 फीट ऊँचा एक वृक्ष होता है। इसके पेड़ की छाल जगह-जगह परत दर सलेटी से रंग की होती है एवं पत्तियाँ हल्की रोयेंदार छह से बारह सेमी लंबी और ढाई से.मी. चौड़ी होती हैं। हरसिंगार के पेड़ पर रात्रि में खुशबूदार छोटे छोटे सफ़ेद फूल आते है, और एवं फूल की डंडी नारंगी रंग की होती है।

हरसिंगार में पाये जाने वाले पोषक तत्व

Harsingar/हरसिंगार के पत्तियों में बेंजोइक एसिड, फ्रक्टोज, ग्लूकोज, कैरोटिन, एस्कॉर्बिक एसिड जैसे कई तरह के पोषक तत्व पाये जाते हैं। जबकि हरसिंगार के फूलों में ग्लाकोसाइड्स होता है और इससे गुणकारी आवश्यक ऑयल निकाले जाते हैं। हरसिंगार के बीज में पाल्मिटिक, ओलेइक और मिरिस्टिक एसिड पाया जाता है।

हरसिंगार के छाल में एल्केनॉयड और ग्लाइकोसाइड्स की मात्रा होती है। हरसिंगार के फूलों में कवकरोधी और विषाणुरोधी गुण पाया जाता है। इन सारे पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण हरसिंगार का उपयोग बीमारियों के इलाज में किया जाता है।

बालों की रूसी

हरसिंगार के बीज को पानी के साथ पीसकर सिर के गंजेपन की जगह लगाने से सिर में नये बाल आना शुरू हो जाते हैं। इसके साथ ही यह रूसी और सफेद बालों को भी ठीक करता है। 50 ग्राम हरसिंगार के बीज पीस कर 1 लीटर पानी में मिलाकर बाल धोने से रुसी समाप्त हो जाती है । इसका प्रयोग सप्ताह में 3 बार करें ।

पेट के कीड़े

प्रातः, दोपहर एवं सायंकाल एक चम्मच हरसिंगार के पत्तों के रस में आधा चम्मच शहद मिला कर चाटने पेट के कीड़े समाप्त हो जाते हैं। इस प्रयोग को कम से कम तीन दिन तक करना चाहिए।

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बबासीर

बबासीर के लिए हरसिंगार के बीज रामबाण औषधि माने गए हैं इसके एक बीज का सेवन प्रतिदिन किया जाये तो बवासीर रोग ठीक हो जाता है। यदि गुदाद्वार में सूजन या मस्से हों तो हरसिंगार के बीजों का लेप बनाकर गुदा पर लगाने से लाभ होता है।

बुखार

इस के पत्ते को पीस कर गरम पानी में डाल के पीजिये तो बुखार ठीक कर देता है और जो बुखार किसी दवा से ठीक नही होता वो इससे ठीक होता है; जैसे चिकनगुनिया का बुखार, डेंगू फीवर, Encephalitis , ब्रेन मलेरिया, ये सभी ठीक होते है।

हारसिंगार के 7-8 पत्तों का रस, अदरक का रस और शहद को मिलाकर सुबह और शाम सेवन करने से पुराने से पुराना मलेरिया बुखार समाप्त हो जाता है।

गठिया अर्थराइटिस दूर करने में हरसिंगार के फायदे

बूढ़े लोगों में अर्थराइटिस (Arthritis) की समस्या आम बात है लेकिन आजकल यह वयस्कों को भी प्रभावित कर रही है। अर्थराइटिस के बेतहाशा दर्द और सूजन से निजात दिलाने में हरसिंगार की पत्तियां बहुत ही ज्यादा कारगर साबित होती हैं। अगर आप अर्थराइटिस से पीड़ित हैं तो हरसिंगार के पत्ते के पावडर को एक कप पानी में उबालकर और इसे ठंडा करके पीने से अर्थराइटिस के दर्द में राहत मिलता है। हरसिंगार का उपयोग प्रतिदिन करने से यह समस्या पूरी तरह दूर हो जाती है।

दमा में लाभकारी

हारसिंगार की छाल का चूर्ण 1 से 2 रत्ती पान में रखकर प्रतिदिन 3-4 बार खाने से कफ का चिपचिपापन कम होकर श्वास रोग (दमा) में लाभकारी होता है।

अस्थमा में हरसिंगार के फायदे

हरसिंगार की पत्तियों को रोज खाने से अस्थमा जैसी बीमारी के लक्षण कम हो जाते हैं। हालांकि यह अस्थमा को पूरी तरह ठीक नहीं करता है लेकिन इसके लक्षणों को इतना कम जरूर कर देता है कि व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई नहीं होती है।

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त्वचा रोग

हरसिंगार की पत्तियों को पीसकर त्वचा पर लगाने से त्वचा से सम्बंधित रोगों में लाभ मिलता है और त्वचा संबंधी समस्याएं समाप्त होती हैं। त्वचा रोगों में इसके तेल का प्रयोग भी उपयोगी है। हरसिंगार के फूल का पेस्ट बनाकर चेहरे पर लगाने से चेहरा उजला और चमकदार हो जाता है।

स्त्री रोग

पारिजात की कोंपल को यदि पाँच काली मिर्च के साथ महिलाएँ सेवन करें तो महिलाओं को स्त्री रोग में लाभ मिलता है। वहीं पारिजात के बीज जहाँ बालों के लिए शीरप का काम करते हैं तो इसकी पत्तियों का जूस क्रोनिक बुखार को ठीक कर देता है।

कफ दूर करने में

 धूम्रपान, ब्रोंकाइटिस (bronchitis), फेफडे में समस्या और गले में इंफेक्शन जैसी कई अन्य वजहों से कफ की समस्या हो जाती है। इससे व्यक्ति को हमेशा गले में कुछ अटका हुआ सा महसूस होता है। कुछ गंभीर मामलों में कफ की वजह से नींद कम आती है और थकान और स्ट्रेस महसूस होता है। इस स्थिति में यदि प्रतिदिन हरसिंगार के पत्तियों को चबाया जाये तो कफ की समस्या जड़ से दूर हो सकती है।

दाद दूर करने में

यदि आप रिंगवर्म या दाद की समस्या से परेशान हैं तो हरसिंगार की पत्तियां इस समस्या को दूर करने में बहुत लाभकारी होती हैं। हरसिंगार की पत्तियों को पीसकर पेस्ट बना लें और प्रभावित स्थान पर लगाने से दाद की समस्या दूर हो जाती है.

हरसिंगार के नुकसान

ऊपर लेख में आपने जाना की हरसिंगार के फायदे गुण लाभ क्या है. अब हम आपको हरसिंगार के नुकसान (harsingar ke nuksan in Hindi) के बारें में बताने जा रहे है –

  • सही मात्रा में हरसिंगार के उपयोग से कोई घातक नुकसान नहीं होता है लेकिन अधिक मात्रा में यदि इसका सेवन किया जाये तो इसका नुकसान जरूर हो सकता है।
  • हरसिंगार का उपयोग स्वाद में कड़वा होता है, जो लोग कड़वे स्वाद के प्रति संवेदनशील होते हैं, हरसिंगार का सेवन करने से उनका जी मिचला सकता है और उल्टी भी हो सकती है।
  • कफ को दूर करने के लिए हरसिंगार का सेवन अधिक नहीं करना चाहिए अन्यथा यह गले में परेशानी पैदा कर सकता है।
  • हरसिंगार की पत्तियां खाने के बाद जीभ पीली पड़ जाती है इसलिए पत्तियों का सेवन करने से पहले यह ध्यान रखना चाहिए।

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