बकरी के दूध के साथ मिलाइए इस फल के बीज – फिर देखिये इसके जबरदस्त फायदे! ज़रूर पढ़िए

सीताफल (Custard Apple) सिर्फ एक फल नहीं बल्कि दवा है. आज मैं आपको इसके बेमिसाल फायदे बता रही हूँ. ज़रूर पढ़िए!

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सीताफल एक बड़ा ही स्वादिष्ट फल है लेकिन लोग इसके बारे में थोड़ा कम जानकारी रखते हैं। सीताफल अगस्त से नवम्बर के आस-पास अर्थात् आश्विन से माघ मास के बीच आने वाला फल है। अगर आयुर्वेद की बात माने तो सीताफल शरीर को शीतलता पहुंचाता है। अगर आप दिन में एक सीताफल का सेवन करते हैं, तो आपको अनेको बीमारियों से निजात मिलेगा।

सीताफल के पोषक तत्व – Custard Apple Nutrients

इसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन सी होता है। इसके अलावा इसमें विटामिन ए , राइबोफ्लेविन , थियामिन , नियासिन आदि तत्व होते है। इसके उपयोग से पोटेशियम , कैल्शियम , आयरन , मैग्नेशियम , मेगनीज तथा फास्फोरस आदि मिलते है।

इसमें दूसरे फलों की अपेक्षा आयरन अधिक मात्रा में होता है । इसमें विटामिन सी और आयरन दोनों होने के कारण यह हिमोग्लोबीन बढ़ाने तथा खून की कमी को दूर करने में प्रभावी रहता है।

आइये जानते हैं इसके बेजोड़ फायदे

सीताफल गुणों का भंडार है. लेकिन बकरी के दूध मिला देने से इसके फायदे और अधिक बढ़ जाते हैं. यहाँ मैं आपको इन्ही के बारे में बता रही हूँ –

पित्तरोग

पके सीताफल को रात में औंस में रखकर सुबह सेवन करने से पित्त की जलन समाप्त होती है।

पागलपन

सीताफल की जड़ का चूर्ण पागलपन में दिया जाता है। इससे दस्त लगकर पागलपन दूर होता है।

पेशाब न आना

सीताफल की बेल की जड़ को पानी में घिसकर पीने से रुका हुआ पेशाब आना शुरू हो जाता है।

मासिकधर्म का बंद होना

मासिक स्राव बंद हो गया हो तो सीताफल के बीज को पीसकर बत्ती बना लें और इस बत्ती को योनि में रखें। इसके प्रयोग से बंद मासिकस्राव शुरू हो जाता है।

पेट की समस्याएँ के लिए

सीताफल का कच्चा फल खाना अतिसार और पेचिश में उपयोगी है। यह शरीर के लिए अत्यंत श्रेष्ठ फल है। जब फल कच्चा हो तब उसे काट कर सुखा दें और पीस कर रोगी को खिलाएं। इससे डायरिया की समस्या सही हो जाएगी।

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सर में जुओं से छुटकारा

सीताफल के बीजों को बारीक पीस कर रात को सिर में लगा लें और किसी मोटे कपड़े से सिर को अच्छी तरह बांध कर सो जाएं। इससे जुएं मर जाती हैं। इस बात का ध्यान रखें कि यह आंखों तक न पहुंचे, क्योंकि इससे आंखों में जलन व अन्य नुकसान हो सकता है। शरीफा के पत्तों का रस बालों की जड़ो में अच्छी तरह मालिश करने से जुएं मर जाती हैं।

घबराहट होने पर

सीताफल घबराहट को दूर करता है। हार्ट बीट को सही करता है। इसकी एक बड़ी किस्म और होती है, जिसे रामफल कहते हैं। जिनका हृदय कमजोर हो, हृदय का स्पंदन खूब ज्यादा हो, घबराहट होती हो, उच्च रक्तचाप हो ऐसे रोगियों के लिए भी सीताफल का सेवन लाभप्रद है।

फोड़े फुंसी

सीताफल के पेड़ की छाल को घिस कर फोड़े फुंसी आदि पर लगाने से ये जल्द ठीक हो जाते है। इसके पत्ते पीस कर लगाने से भी फोड़े फुंसी में आराम मिलता है। घाव में कीड़े पड़ गए हों तो सीताफल के पत्ते पीस कर इसमें सेंधा नमक मिलाकर पुल्टिस बांधने से कीड़े नष्ट होकर घाव मिटता है।

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गंजापन

सीता फल के बीज और बकरी का दूध साथ में पीस कर सिर पर लगाने से गंजापन दूर होकर बाल उगने लगते है। यह दूध आँखों में नहीं जाये इसका ध्यान रखना चाहिए।

सीताफल खाते समय सावधानी

सीताफल के बीज और पत्तों में कुछ विषैले तत्व पाये जाते है। इसलिए बीज या पत्ते खाने नहीं चाहिए। सीता फल का बीज मुंह में चबाने पर इसमें से विषैला तत्व निकल कर मुंह में आ सकता है , जो नुकसान देह हो सकता है अतः सीता फल खाते समय ध्यान रखना चाहिए।

गलती से साबुत बीज निगलने में आ जाये तो परेशानी की बात नहीं होती है। यह बिना पचे मलद्वार से बाहर निकल जाता है।

सीताफल में केलोरी व शक्कर अधिक होते है। इसमें सेब , संतरा आदि से दुगनी मात्रा में केलोरी होती है। इसलिए यदि डायबिटीज हो तो सीताफल नहीं खाना चाहिए।

यदि वजन कम करना चाह रहे हों तो अधिक मात्रा में Sitafal ना खाएँ। इसके उपयोग से वजन बढ़ सकता है।

अधिक सीताफल खाने से ठंड लगकर बुखार आ सकता है। ठंडी तासीर वालों को ध्यान रखना चाहिए।

कम मात्रा में Sitafal खाने से किसी प्रकार के नुकसान की सम्भावना कम ही होती है। फिर भी डायबिटीज या जुकाम की अवस्था में चिकित्सक से परामर्श के बाद ही इसे खाएँ।

सीताफल का ज्यादा सेवन करने से ठंड लगकर बुखार हो जाता है। जिनकी पाचन क्रिया मंद हो या जुकाम हो उसे सीताफल का सेवन नहीं करना चाहिए। सीताफल के बीज आंखों में जाने पर जलन होती है।

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Satya Sharma

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