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बवासीर अब इतनी ज्यादा क्यों होने लगी है? इससे कैसे बचें? जान लीजिये!

बवासीर में व्यक्ति को काफी पीड़ा पहुंचती है। मल द्वार की शिराओं के फूलने से यह बीमारी होती हैं |आयुर्वेद में अर्श और आम भाषा में बवासीर (Piles) के नाम से जाना जाता है। यह रोग बादी और खूनी बवासीर के नाम से दो प्रकार का होता है। बादी बवासीर में गुदा में पीड़ा, खुजली और सूजन होती है, जबकि खूनी बवासीर में मस्सों से रक्तस्राव होता है।

कारण :-

पाइल्स होने के प्रमुख कारणों में कब्ज अजीर्ण की शिकायत, ज्यादा शराब पीने, नशीली चीजें खाना, मिर्च-मसालेदार, तले हुए गरिष्ठ पदार्थों कार्य करना, श्रम व व्यायाम न करना, देर रात तक जागना, पेट की खराबी, घुड़सवारी आदि होते हैं। बवासीर में खानपान का विशेष रूप से ख्याल रखना चाहिए खासतौर पर क्या नहीं खाना चाहिए | इससे आप इस बीमारी की तकलीफों से बच सकते हैं |

बवासीर में क्या खाना चाहिए

फाइबर से भरपूर फल-सब्जियों का सेवन जरूरी : चूंकि फलों और सब्जियों में अनेक पोषक तत्वों के अलावा फाइबर भी होते हैं, इसलिए ये रोग प्रतिरोधक क्षमता तो बढ़ाते ही हैं, कब्ज की स्थिति को भी सुधारते हैं। इसी के साथ ये शौच के वक्त दबाव और दर्द को भी कम करने में मदद करते हैं। वैसे तो सभी फलों में फाइबर होते हैं, इसलिए सभी लाभदायक हैं, पर ज्यादा फाइबर वाले फलों में बेरी, सेब, आलूबुखारा, नाशपाती, एवोकैडो, अंजीर, बेल, अनार, चीकू, अंगूर, पपीता, संतरा, बब्बूगोशा, मीठा नींबू, मौसमी, माल्टा खाएँ।

अपने खाने में कच्चा नारियल, केला, सेब, पालक, संतरे, आड़ू, मशरूम, आंवला भी शामिल करें ।

भोजन में ताजा फल, कच्ची सब्जियाँ, सलाद आदि बहुत बढ़ा दें। फल वृक्ष पर पके ही अच्छे रहते हैं।

ज्यादा फाइबर वाली सब्जियों में हाथीचक (आर्टीचोक), मटर, ब्रोकोली, हरी पत्तेदार सब्जियां, बींस शामिल हैं। तुरई, चौलाई, शलजम, टमाटर, खीरा, भिंडी, परवल, कुलथी, टमाटर, गाजर, जिमीकंद, पालक, मटर, दालें, ओट मील, काले चने, चुकंदर नियमित खाएं।

ज्यादा-से-ज्यादा साबुत अनाज खाएं : साबुत अनाजों में ज्यादा फाइबर, प्रोटीन और अन्य सभी जरूरी पोषक तत्व शरीर को प्राप्त होते हैं। गेहूं के पौधे को पीसे। इसके रस को पीना ठीक रहता है। इसे गेंहू के जवारे (wheat grass) कहा जाता है |

बवासीर में रिफाइंड अनाजों (सफेद आटा, सफेद चावल, मैदा) के बजाय ज्यादा-से-ज्यादा साबुत अनाजों (दलिया, ब्राउन राइस, होल ग्रेन ब्रेड, जौ, सामान्य पिसा आटा, चौलाई, बाजरा, भुट्टा, पॉपकॉर्न आदि) का सेवन करना चाहिए।

बवासीर में गेहूं, ज्वार के आटे की चोकर सहित बनी रोटी, दलिया, जौ, पुराने चावल, अरहर, मूंग की दाल भोजन में खाएं।

पाइल्स में प्रतिदिन भोजन के साथ मूली खाएं। भोजन के बाद 2-3 अमरूद खाएं।

दोपहर में नियमित रूप से पपीता खाएं ताकि कब्ज ना बने |

बवासीर में दही को बनाए अपना साथी : दही हमारे पेट और आतों को प्रोबायोटिक (लाभदायक बैक्टीरिया) मुहैया कराती है। ये बैक्टीरिया न केवल पाचन-तंत्र को दुरुस्त करते हैं, बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ावा देते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के अध्ययन के अनुसार, दही बवासीर को रोकने या इसके इलाज में बहुत मददगार साबित होती है। इसलिए इसका नियमित सेवन करना चाहिए।

विशेष उपाय : विशेषज्ञों के अनुसार, एक कटोरी में दही लें। कुछ काली सरसों के दाने लें और उन्हें पीसकर दही में डाल दें। इस दही को खा लें। उसके बाद एक गिलास मट्ठा पी लें। रोज ऐसा करें, बवासीर में बहुत फायदा होगा।

तरल पदार्थ बहुत ही आवश्यक : बवासीर में राहत के लिए शरीर को ज्यादा-से-ज्यादा तरल पदार्थ देना जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, व्यक्ति को रोजाना आठ से दस गिलास पानी जरूर पीना चाहिए। साथ ही मलाई निकला दूध, मट्ठा और फलों का रस भी लेते रहना चाहिए।

करेले का रस या छाछ (थोड़ा नमक व अजवाइन मिला कर) या दही की लस्सी पिएं।

बवासीर में खून जाने की तकलीफ हो, तो धनिए के रस में मिस्री मिलाकर सुबह-शाम पिएं।

बवासीर में पानी का सेवन अधिक करें।

बकरी के दूध की दही और गाजर का रस : बवासीर, खासकर खूनी बवासीर के लिए विशेषज्ञ एक खास उपाय बताते हैं। इसके तहत बकरी के दूध की रात भर में जमी करीब एक पाव (250 मिली लीटर) दही लें। इसमें इतनी ही मात्रा में गाजर का रस मिलाएं और पी जाएं।

जीरे के दाने और एक गिलास पानी : एक चम्मच जीरे के दाने भून लें। भूनने के बाद इनमें एक चम्मच सादा जीरे के दाने और मिला लें। इस मिश्रण को एक गिलास पानी में डालकर अच्छी तरह से मिला लें और दानों समेत पी जाएं। रोजाना एक बार पीएं, बहुत लाभ होगा।

पाइल्स में अंजीर भी है बहुत असरकारक : कुछ अंजीर लें और उन्हें रात भर के लिए पानी में रख दें। इसके बाद सुबह उठकर खाली पेट आधे अंजीर खा लें और आधा ही पानी पी लें। बाकी अंजीर और पानी का सेवन शाम को करें। रोजाना सुबह-शाम ऐसा करें।

मट्ठा के साथ करेले का जूस : करेले का जूस बनाएं और इसे मट्ठा के साथ पी जाएं। रोज ऐसा करें, विशेषज्ञ कहते हैं कि इससे बवासीर की समस्या में बहुत फायदा होगा।

बवासीर में चीनी के साथ प्याज का सेवन करें : खूनी बवासीर के लिए एक प्याज लें और उसे अच्छी तरह से धोकर, छीलकर और काटकर तीन चम्मच चीनी के साथ सेवन कर जाएं। ऐसा दिन में दो बार करें। विशेषज्ञ कहते हैं कि यदि कोई व्यक्ति ऐसा नियमित कर सके तो यह बवासीर में बहुत लाभ होगा |

खूनी बवासीर में इन चार चीजो का काढ़ा बनाकर पीने से भी लाभ मिलता है – चिरायत, लाल चंदन, सौंठ, जवासा |

बवासीर में आम की गुठली और शहद खाने के फायदे : कच्चे आम की गुठली को ग्राइंडर में पीस लें। इसके बाद इस पाउडर की दो मिली ग्राम मात्रा दिन में दो बार शहद के साथ लें।

कब्ज का काम तमाम करता है खजूर : खजूर एक प्राकृतिक कब्ज नाशक है। बवासीर के रोगी को यह कब्ज नहीं होने देगा, इसलिए बवासीर में खजूर का सेवन भी बहुत राहत देने का काम करता है।

सुबह और शाम एक मूली को कद्दूकस कर लें और फिर उसमें शहद मिला लें। इसके बाद 60 से 90 मिलीलीटर मात्रा में सेवन करें। रोजाना दो वक्त ऐसा करने से बहुत लाभ होगा।

बवासीर में रोजाना सुबह के वक्त जामुन को नमक लगाकर खाने से भी बवासीर के रोगी को काफी फायदा होता है।

बवासीर में परहेज:-

बवासीर में भारी, उष्ण, तीक्ष्ण, गरिष्ठ, मिर्च-मसालेदार, चटपटे पदार्थ भोजन में न खाएं।

बवासीर में बासी भोजन, उड़द की दाल, मांस, मछली, अंडा, चना, खटाई का सेवन न करें।

बवासीर में बैगन, आलू, सीताफल, गुड़, डिब्बा बंद आहार (Processed foods) से परहेज करें।

कैफीन : बवासीर में कॉफी और कैफीनयुक्त चाय से दूर रहें। चाय के बजाय Herbal Tea का सेवन करें।

ज्यादा चीनी और उससे बने उत्पाद, घुइयाँ, खटाई, पकौड़े, चाट-टिकिया, समोसे से परहेज करें।

बवासीर में शराब का भी परहेज रखें।

ज्यादा तला भोजन : ऐसा भोजन रोगी की समस्या बढ़ाने के अलावा कुछ नहीं करेगा।

मसाले : भोजन में कम-से-कम मसालों का इस्तेमाल करें।

मांस-अंडा : पाइल्स में दोनों ही पदार्थों से रोगी को दूर रहना चाहिए।

घी-मक्खन-पनीर : कम-से-कम सेवन करें।

आइसक्रीम : इससे भी दूर ही रहें।

जैली, चॉकलेट, कैंडी, कुकीज, केक, ब्रेड, पास्ता, सफेद चावल, मैदा और सभी फास्ट फूड।

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Satya Sharma

मैं अंग्रेजी दवाओं के मुकाबले घरेलु नुस्खों, आयुर्वेद और देसी इलाज को ज्यादा महत्चपूर्ण और कारगर मानती हूँ. सही खान-पान से और नियमित दिनचर्या से वैसे ही बीमारियों से बचा जा सकता है. अंग्रेजी दवाओं के दुष्प्रभाव से बचाने और भारतीय चिकित्सा पद्दति को बढ़ावा देने के लिए मेरी वेबसाइट से जुड़िये और अपने दोस्तों को भी इसके बारे में बताइए.

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