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जानिए कैसे पानी से नहाना (Bath) चाहिए! आयुर्वेद क्या कहता है?

नहाना (Bath) अच्छी सेहत के लिए बेहद ही ज़रूरी है. न केवल साफ़ सफाई बल्कि बीमारियों से दूर रहने में भी सही तरीके से किया स्नान भूमिका निभाता है.

आपने बढे बूढों को अकसर कहते हुए सुना होगा कि आधी बीमारी तो नहाने से ही कट जाती है!” यह बात सही भी है.

लेकिन कभी कभी दुविधा बनी रहती है कि ठन्डे पानी से नहाया जाये या गरम से या गुनगुने से? ये समझ नही आता. आखिर आयुर्वेद इसके बारे में क्या कहता है?

अब सुविधाएं इतनी बढ़ गयी हैं कि सर्दियों में मिनटों में गरम पानी मिल जाता है और गर्मियों में ठंडा. लेकिन सुविधाओं के साथ बीमारियाँ भी बढ़ी हैं ये भी तो आपने देखा होगा.

मेरे दादा जी 82 की उम्र तक भी चाहे सर्दी हो या गर्मी, हमेशा ठन्डे पानी से नहाते थे. लेकिन क्या सिर्फ ठंडा पानी ही सही है?

दरअसल, ठन्डे पानी से नहाने के जहाँ बेशुमार फ़ायदे हैं, वहीं गर्म पानी से नहाना भी कुछ फायदे लिए हुए है.

आज आपको इसी के बारे में बताया गया है. जानने के लिए पढ़ते रहिये –

ठन्डे पानी से नहाने (Bath) के फायदे –

सुबह के समय ठंडे पानी से नहाने से आलस दूर हो जाता है।

ठंडे पानी से नहाने से डिप्रेशन को दूर करने वाले बीटा एंडोर्फिन नामक केमिकल के रिलीज होता है।

अध्‍ययन के अनुसार ठंडे पानी से नहाने से टेस्‍टोस्‍टेरोन के रिलीज में मदद होती है जिससे पुरुषों में प्रजनन स्वास्थ्य में सुधार होता है.

ठंडे पानी से नहाने से फेफड़ों को कार्य करने की छमता का विकास होता है।

ठंडा पानी प्रतिरक्षा प्रणाली और लसीका को उत्तेजित करता है जिससे संक्रमण के खिलाफ लड़ने के लिए शरीर में नई कोशिकाएं बनती हैं।

गर्म पानी से नहाने के फायदे –

गर्म पानी से शरीर पर पसीने और गंदगी से जमा कीटाणुओं को तेजी से मारता है। इस तरह गर्म पानी से नहाने से शरीर साफ होता है।

गुनगुना पानी मांसपेशियों के लचीलेपन में सुधार और मांसपेशियों में दर्द होने पर आराम देता है।

गर्म पानी से नहाने से शरीर में शुगर के स्‍तर को कम करने और डायबिटीज के खतरे को कम करने में मदद मिलती है है।

खांसी और सर्दी होने पर गर्म पानी से नहाना फायदेमंद होता है।

तो ठंडा पानी चुनें या गर्म?

आयुर्वेद की मानें तो आपको शरीर के लिए हल्का गर्म पानी और चेहरे, आंखों और बालों के लिए ठंडे पानी का इस्‍तेमाल करना चाहिए। तेज गरम पानी तो कभी भी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

आयुर्वेद के अनुसार पानी के तापमान का निर्धारण निम्‍नलिखित कारकों के आधार पर किया जाना चाहिए –

उम्र के आधार पर

युवाओं और बुजुर्ग लोगों को ‍गर्म पानी से नहाने का सु‍झाव दिया जाता है। लेकिन अगर आप छात्र है और अपना ज्‍यादातर समय पढ़ने में लगाते हैं, तो आपके ठंडे पानी से नहाना ज्‍यादा फायदेमंद होगा. इससे दिमाग शांत रहता है।

समय के आधार पर

अगर आप सुबह के समय नहाते हे तो ठंडे पानी से नहाना (Bath) बेहतर रहता है। लेकिन अगर आप रात में नहाते हैं तो आराम महसूस करने के लिए गर्म पानी से नहाना चाहिए।

चूंकि शाम के समय वात का प्रभाव शरीर पर ज्यादा होता है इसलिए गर्म पानी से नहाना फायदेमंद होगा।

शारीरिक के आधार पर

अगर आपके शरीर का प्रकार पित्‍त है तो आपके लिए ठंडे पानी से नहाना बेहतर रहता है और अगर आपके शरीर का प्रकार कफ या वात है तो गर्म पानी का उपयोग करें।

रोगों के आधार पर

अगर आप पित्‍त से संबंधित किसी रोग जैसे अपच या लीवर संबंधित विकार से पीडि़त हैं, तो ठंडे पानी से नहाना (Bath) आपके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत फायदेमंद होगा।

लेकिन, अगर आप कफ या वात से संबंधित विकारों से पीड़ि‍त हैं तो गर्म पानी से नहाना चाहिए।

अगर आप मिर्गी रोगी हैं, तो गर्म और ठंडे पानी दोनों से नहाने के लिए मना किया जाता है इसकी बजाय, गुनगुने पानी से नहाना चाहिए।

आयुर्वेद के अनुसार कैसे नहायें

आयुर्वेद के अनुसार, “जल्‍दबाजी में नहाना जल्‍दबाजी में भोजन करने की तरह होता है और आपके शरीर को सभी लाभ नहीं मिल पाते और आप जल्‍दी में नहाते है तो ठीक से शरीर की सफाई भी नहीं होती।“

ताजगी पाने के लिए नहाने का अच्‍छा अनुभव करना जरूरी होता है। आप इस प्रक्रिया का धीरे-धीरे का पालन करें।

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Satya Sharma

मैं अंग्रेजी दवाओं के मुकाबले घरेलु नुस्खों, आयुर्वेद और देसी इलाज को ज्यादा महत्चपूर्ण और कारगर मानती हूँ. सही खान-पान से और नियमित दिनचर्या से वैसे ही बीमारियों से बचा जा सकता है. अंग्रेजी दवाओं के दुष्प्रभाव से बचाने और भारतीय चिकित्सा पद्दति को बढ़ावा देने के लिए मेरी वेबसाइट से जुड़िये और अपने दोस्तों को भी इसके बारे में बताइए.

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