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जानिये बरगद के पेड को ईश्वर का वरदान क्यों कहा जाता है.

आज मैं आपको बरगद के पेड के औषधीय लाभ के बारे में बताने जा रही हूँ.

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बरगद या वटवृक्ष को हिंदू धर्म में एक पवित्र वृक्ष माना जाता है। इसके साथ हमारी कई धार्मिक आस्थाएं व मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। यह पुनर्जीवन और जीवन की सजीवता का प्रतीक पेड़ है, जिसमें बहुत सारे औषधीय गुण पाए जाते हैं। प्राचीन समय में हिंदू व्यापारी जो बनिया थे, इस वृक्ष की पूजा करते थे, और इसकी छांव में बैठ कर अपना व्यवसाय करते थे, इसी वजह से अंग्रेजों ने इसे बनियन ट्री का नाम दे दिया। बरगद या वटवृक्ष की छाया बहुत विस्तृत व घनी होती है।

इस औषधीय पेड़ को सदाबहार वृक्षों (Evergreen tree) की श्रेणी में रखा जाता है। बरगद के पेड़ की विशेषता यह है कि यह पेड़ सैकड़ों वर्षो तक जीवित रह सकता है। इस पेड़ की ऊंचाई लगभग 21 मीटर तक हो सकती है। इसकी पत्तियां 10 – 20 सेंटी मीटर लंबी हो सकती है और इसके तनों से बहुत सी जड़ें भी निकलती हैं। इनके पत्‍तों को तोड़ने पर सफेद और गाढ़ा दूध निकलता है। इसका आकार बहुत बड़ा होता है, यदि बरगद का पेड़ वयस्‍क है तो इसकी छांव में लगभग 5000 लोग बैठ सकते हैं। बरगद का पेड़ धार्मिक महत्‍व रखने के साथ-साथ आयुर्वेद में भी प्रमुख रूप से उपयोग किया जाता है। बरगद के पेड़ के फायदे प्राप्‍त करने के लिए आप इसकी जड़ों, छाल, पत्‍ते, फूल और फलों का उपयोग कर सकते हैं। अर्थात इस पेड़ के सभी हिस्‍से औषधीय गुण से भरपूर होते हैं।

बरगद के पेड़ के औषधीय गुण-

बरगद के पेड़ के पोषक तत्‍व-

पोषक तत्‍वों से भरपूर बरगद के पेड़ में बी सीटोस्‍टर (B Sitoster), एस्‍टर, ग्‍लाइकोसाइड्स, ल्‍यूकोसाइनिडिन, क्‍वार्सेटिन, स्‍टेरोल और फ्राइडेलिन (Friedelin) अच्‍छी मात्रा में मौजूद रहते हैं। इनके अलावा इसमें बर्गप्‍टन, फ्लेवोनॉयड, गैलेक्‍टोज, इनोजिटोल, ल्‍यूकोप्‍लेयर, रूटीन और टैनिन भी शामिल होते हैं। बरगद के पेड़ में केटोन, पॉलिसाक्राइड सिटोस्‍टेरॉल और टॉग्लिक एसिड भी मोजूद रहते हैं।

पेशाब की समस्या से बचाव करे बरगद की छाल के गुण-

वटवृक्ष के छाल से तैयार पाउडर की दो चम्मच मात्रा को, एक गिलास पानी में घोलकर इसे अच्छी तरह उबालें, जब तक कि मिश्रण का पानी आधा ना हो जाए और इस प्रकार तैयार काढ़े का सेवन दिन भर करते रहें, यह उपाय अत्यधिक पेशाब आने की परेशानी को दूर करने में बहुत मदद करता है।

पेशाब की समस्या-

बार बार पेशाब जाने की समस्‍या से राहत बरगद के बीज को सुखा कर महीन पावडर पीस लें। फिर रोजाना 1-2 ग्राम पावडर को गाय के दूधा के साथ सेवन करें। ऐसा दिन मे दो बार करें।

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बरगद के फायदे दस्‍त के इलाज में-

इस औषधीय पौधे से प्राप्‍त होने वाले कोमल और उभरते पत्‍तों (Budding Leaves) को पानी के साथ लेना दस्‍त के लिए फायदेमंद होता है। क्‍योंकि इसमें बंधन कारी गुण होते हैं जो जठरांत्र से उतपन दस्‍त, पेचिश (Dysentery), गैस और जलन आदि परेशानियों को ठीक करता है। इन पत्तियों को प्राकृतिक चीनी और धनियां के पत्‍तों के साथ चबाने पर बहुत ही फायदे मंद होता हैं। दस्‍त से छुटकारा पाने के लिए आप बरगद के पेड़ के फायदे प्राप्‍त कर सकते हैं जो कि आयुर्वेदि उपचार के लिए जाने जाते हैं।

शीघ्रपतन की समस्या से मुक्ति-

बरगद के पत्तों को सुखाकर पाउडर बनाएं, और दूध के साथ रोज सुबह, एक चम्मच लें। इसके अलावा बरगद के दूध रूपी द्रव्य को मिश्री के साथ खाने से भी इस समस्या का हल होता है। इसके अलावा हींग के छोटे टुकड़े को फ्राईकर आधा चम्मच बरगद के दूधरूपी द्रव्य में मिलाएं। रोज सुबह इसका सेवन करने से यौन संबंधी कमजोरी दूर होती है।

दांतों के संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए-

बरगद के पेड़ से ताजा पत्तियां या डाली तोड़कर, उसमें से निकलने वाला दूध के रंग के अर्क को जमा करें। फिर इसमें थोड़ा शहद मिला लें। इसे अपने मसूढ़ों पर लगाएं और 10 मिनिट तक इंतजार करें। इसके बाद कुल्ला कर लें। बरगद की छाल का, नीम की तरह दातौन के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे दांतों की सफाई करने से दांत मजबूत होते हैं। यदि सांस की दुर्गंध दूर करना हो तो, करीब 1 इंच लंबी बरगद के पेड़ की छाल लें और पानी में उबाल लें। इस पानी से गरारे करने से आपके मुंह और सांस की दुर्गंध दूर हो जाएगी।

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डायबिटीज का करे इलाज-

डायबिटिज, यानी मधुमेह के इलाज में भी बरगद की छाल काफी प्रभावी होती है। करीब 2 इंच लंबी छाल लें, और इसे रातभर पानी में भिगो कर रखें। सुबह निकालकर, इसे दबाएं (स्क्वीज करें) और जो भी द्रव्य निकले, उसे अलग जमा कर लें। इसे छान लें और फिर इस्तेमाल करें। इसके अलावा बड़े चम्मच में छाल पाउडर लें और दो गिलास पानी डाल कर, उबालें। ऐसा तबतक करें जबकर कि पानी का अनुपात आधा न रह जाए। इसे छान लें और रोजाना इस्तेमाल करें।

कोलेस्‍ट्रॉल कम करने में बरगद के पेड़ के लाभ-

आपके हृदय स्‍वास्‍थ्‍य (Cardiovascular Health) को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारणों में से एक कोलेस्‍ट्रॉल की अधिक मात्रा होती है। हमारे शरीर में दो प्रकार के कोलेस्‍ट्रॉल होते हैं, “अच्‍छे” और “बुरे” । बरगद के पेड़ की छाल में खराब कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर को कम करने की क्षमता होती है जो कि बरगद के पेड़ के फायदे के रूप में जाना जाता है। बरगद के पेड़ शरीर में अच्‍छे कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर को बढ़ाने में भी मदद करते हैं। आप अपने दिल को लंबे समय तक स्‍वस्‍थ्‍य बनाए रखना चाहते हैं तो बरगद के पेड़ के फायदे प्राप्‍त कर सकते हैं।

बरगद की जटा के गुण उल्‍टी को रोके-

आप अपने पेट की समस्‍याओं और उल्‍टी को रोकने के लिए बरगद की जड़ों का उपयोग कर सकते हैं। इसके लिए आप जड़ों को पानी के साथ मिलाकर जलसेक तैयार कर सकते हैं जो आपके जीआई ट्रैक को शांत करने में मदद करता है।

बरगद के दूध का उपयोग मस्‍से के लिए-

त्‍वचा के मस्‍सों को दूर करने के लिए बरगद के पेड़ के फायदे प्राप्‍त किये जा सकते हैं। मस्‍सों का इलाज करने के लिए बरगद के दूध का उपयोग किया जाता है। अच्‍छे परिणाम प्राप्‍त करने के लिए तिल मस्‍से पर इस दूध को दिन में तीन बार लगाना चाहिए। यह अपको मस्‍सों से छुटकारा दिला सकता है।

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