अगर आप भी ये तेल इस्तेमाल कर रहे है तो हार्ट अटैक के लिए तैयार रहे, जानिये कैसे

क्‍या आप खाना पकाने के लिए रिफाइंड ऑयल का इस्‍तेमाल करते हैं? अगर हां तो आपको सावधान हो जाना चाहिए क्‍योंकि जिस रिफाइंड आयल को आप सेहत के लिए फायदेमंद समझकर खाने में इस्‍तेमाल कर रहे हैं, असल में वह आपकी सेहत के लिए गंभीर तरह की स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याएं पैदा कर सकता है। विश्‍वास नहीं हो रहा, तो आइए इस आर्टिकल के माध्‍यम से जानें कैसे रिफाइंड ऑयल आपकी सेहत को बिगाड़ रहा है।

जी हां, तेल भोजन के स्‍वाद को बढ़ाने के साथ हमारे स्‍वास्‍थ्‍य के लिए भी महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है। तेल न सिर्फ शरीर को एनर्जी प्रदान करता है, बल्कि फैट में अवशोषित होने वाले विटामिन जैसे-के, ए, डी, ई के अवशोषण में भी सहायक होता है। लेकिन बाजार में बड़ी तादाद में उपलब्‍ध कुकिंग ऑयल में से अपने लिए तेल को चुनना इतना भी आसान नहीं होता।

क्यों न खाएं रेफाइंड तेल  :-

किसी भी तेल को रिफाइंड होने में 6 से 7 केमिकल इस्तेमाल होते है और डबल रेफिंद में 12 से 13 केमिकल इस्तेमाल होते हैं वो सभी केमिकल मनुष्य द्वारा तैयार किये हुए हैं। भगवान द्वारा बनाये गये एक भी केमिकल यानि प्रकृति द्वारा दिए गये आर्गेनिक केमिकल तेल को रेफफाइंड नही कर सकता जितने भी केमिकल तेल को साफ़ करने में इस्तेमाल होते हैं वो सभी इनोर्गानिक केमिकल हैं। और इनोर्गानिक केमिकल ही दुनिया में जहर बनाते हैं और उनका कॉम्बिनेशन ही जहर की तरफ लेकर जाता है।

आज कि दुनिया में मॉडर्निजम यानि आधुनिकता के नाम पर जितने भी इनोर्गानिक केमिकल जगह जगह यूज हो रहे हैं वहां वहां ये आपको उस तरफ ले जा रहे हैं जहाँ आप जहर अपने ही शरीर में पैदा करते हैं इसलिए रिफाइंड तेल या डबल रिफाइंड तेल मत खाइए।

वैज्ञानिकों द्वारा जब शुद्ध तेल माने कच्ची घानी तेल पर रिसर्च किया गया तो उन्होंने पाया कि चिपचिपापन तेल का प्रमुख घटक है जैसे मिटटी में माइक्रोन्यूट्रीयंट्स होते हैं जैसे कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम होते है ऐसे तेल में भी है तो तेल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है वो उसका चिपचिपापन ही है और जैसे ही तेल में से ये चिपचिपापन निकाला तो पता चला वो तेल ही नही बचा तेल जिस चीज के लिए खाया जाता है वो बचा ही नही और पाया कि जो तेल में से बांस आ रही है वो उसमें प्रोटीन की वजह से है क्योंकि तेल में प्रोटीन बहुत होता है दालों के बाद सबसे ज्यादा प्रोटीन तेल में ही है जब तेल कि बांस ख़त्म कर दी जाये तो समझ लेना कि उसका प्रोटीन घटक निकल दिया गया।

अब बांस निकल दी तो प्रोटीन गयब और चिपचिपापन निकल दिया जाये तो फैटी एसिड गायब जब उसकी दोनों ही चीजें निकल गयी तो अब वो तेल नही रहा वो अब पानी है तो वागभट्ट जी कहते हैं कि वात की अगर चिकित्सा करनी है तो ध्यान रहे की आप शुद्ध तेल ही खाएं क्योंकि दुनिया में सबसे ज्यादा रोग वात के ही हैं।

शुद्ध तेल पे किया गया परीक्षण :-

शुद्ध तेल का इफ़ेक्ट(फायदा) देखने के लिए कुछ लोगों पर एक्सपेरिमेंट किया गया जिन लोगों को बहुत सी समस्याएं हैं कोलेस्ट्रोल की, ट्राईग्लिसराइड की, बी पी की, उन लोगों को छत्तीसगढ़ में इकठा किया गया उन लोगों को कहा गया कि तुम डॉक्टर के पास जाना छोड़ दो और वागभट्ट की चिकित्सा करो।

छत्तीसगढ़ भारत में एकमात्र ऐसा राज्य है जहाँ शुद्ध तेल आज भी मिलता है गाँव गाँव में तेल निकालने वाली घानियाँ आज भी हैं सरसों आसानी से उपलब्ध है यही प्रयोजन था की उनका इलाज वहां किया गया तीन साढ़े तीन साल तक यही परीक्षण किया गया।

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जिन जिन लोगों का रिफाइंड तेल बंद करवा के शुद्ध तेल पे लाया गया तो अब जब उनको डॉक्टर्स को उनकी पुरानी और नयी रिपोर्ट दिखाते हैं तो उनकी पुराणी रिपोर्ट देखके डॉक्टर्स बोलते हैं कि पुराणी रिपोर्ट के मुताबिक तो इन रोगियों 8 दिनों सी ज्यादा जीवित नही रहना चाहिए था हार्ट अटैक आना ही चाहिए था और मरना ही चाहिए था तो आप बचे कैसे हैं।

और जब आज कि रिपोर्ट वो देखते हैं तो कहते हैं कि ये बस जादू ही हो सकता है तो बताते है कि उन्होंने  सिर्फ शुद्द तेल खाया और जो तेल के घटक होते हैं वो उनको भरपूर मात्र में मिले इसलिए उनके ट्राईग्लिसराइड कम हुए, कोलेस्ट्रोल लेवल यानि VLDL , LDL  कोलेस्ट्रोल लेवल कम हुए, HDL उनका बहुत तेजी से बड़ा जो कि बढ़ना ही चाहिए BP उनका अपने आप कम हुवा, और सबसे जरुरी बात हार्ट अटैक आने की जो कंडीशन बनी हुयी थी पूरी तरह से ख़त्म हुयी और दो ऐसे रोगी जिनके हार्ट में भयंकर ब्लॉकेज थी तो वो ब्लॉकेज भी नही है।

आज से 20-25 साल पहले हमारे घरों में बहुत सी चीजों में तेल का उपयोग होता था तो उस समय किसी को हार्ट अटैक नही होता था कारण ये था कि उस समय रिफाइंड तेल नही होता था पुराने बड़े बूढ़े बताते हैं कि हार्ट अटैक के बारे में कभी सुना ही नही था और इस रिफाइंड तेल की वजह से 17 साल के बच्चे हार्ट की बाईपास सर्जरी करवा रहे हैं ये तो बहुत दुःख की बात है।

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Satya Sharma

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